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संयुक्त राष्ट्र की पहल से बदले 42 हजार कचरा बीनने वालों के दिन, सामाजिक सुरक्षा के साथ मिली नई पहचान

यूएनडीपी के 'प्रोजेक्ट उत्थान' के तहत देश भर के सफाई मित्रों को बैंकिंग सेवाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़कर सशक्त बनाया जा रहा है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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2 सितंबर 2026 · 6:50 am58 व्यूज़
संयुक्त राष्ट्र की पहल से बदले 42 हजार कचरा बीनने वालों के दिन, सामाजिक सुरक्षा के साथ मिली नई पहचान
संयुक्त राष्ट्र की पहल से बदले 42 हजार कचरा बीनने वालों के दिन, सामाजिक सुरक्षा के साथ मिली नई पहचानHindustan Times

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और उसके सहयोगी संगठनों की एक विशेष पहल के जरिए देशभर के 42 हजार से अधिक कचरा बीनने वाले श्रमिकों को सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण संरक्षण के मुख्य सहयोगी के रूप में नई पहचान मिली है। 'प्रोजेक्ट उत्थान' के तहत इन सफाई मित्रों को औपचारिक अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेवाओं और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इस बदलाव से शहर के कचरे को छांटने वाले इन कामगारों को आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन भी मिल रहा है।

वर्ष 2020 से गति पकड़ने वाली इस मुहिम के जरिए कामगारों के पहले बैंक खाते खोले गए और उन्हें बचत व बीमा की आदतों से जोड़ा गया। दिल्ली में काम करने वाले 48 वर्षीय जोगिंदर केवट के अनुसार, परियोजना से जुड़ने से पहले उनकी कमाई महज 100 से 150 रुपये प्रतिदिन थी और जीवन में कोई स्थिरता नहीं थी। अब नियमित आजीविका मिलने और सरकारी योजनाओं की जानकारी होने से वह अपने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च बेहतर तरीके से संभाल पा रहे हैं।

इसी तरह दिल्ली की रहने वाली रशीदा और शबाना जैसे कई अन्य श्रमिकों के जीवन में भी बड़ा सुधार आया है। शबाना ने बताया कि परियोजना के माध्यम से उन्हें ई-श्रम कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, जिससे अस्पताल में इलाज की सुविधा बेहद आसान हो गई। इन सहूलियतों के चलते अब वे आर्थिक रूप से अधिक स्थिर हैं और अपने गांव में पक्का मकान बनाने में सक्षम हो सकी हैं।

परियोजना के तहत कचरे के पुनर्चक्रण (अपसाइक्लिंग) पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। दिल्ली स्थित एक केंद्र पर दूध के इस्तेमाल किए गए खाली पाउच को धोकर और सुखाकर प्लास्टिक की पट्टियों में काटा जाता है। इसके बाद इन पट्टियों को सूती धागों के साथ लकड़ी के फ्रेम पर बुनकर सुंदर हैंडबैग, पर्स और गमले के कवर जैसी उपयोगी वस्तुएं तैयार की जाती हैं।

भारत में यूएनडीपी की प्रतिनिधि एंजेला लुसिगी के अनुसार, यह अभियान दर्शाता है कि जलवायु सुधार की शुरुआत स्थानीय स्तर पर इंसानों से ही होती है, और कचरा बीनने वाले रोजाना इस काम को अंजाम देते हैं। वहीं यूएनडीपी इंडिया के पर्यावरण प्रमुख आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि इन कामगारों के लिए योजनाओं का लाभ लेने में पात्रता नहीं, बल्कि जागरूकता और आत्मविश्वास की कमी सबसे बड़ी रुकावट थी, जिसे इस परियोजना के जरिए दूर किया गया है।

इनसे संबंधितdelhi-ncrUNDPWaste PickersProject UtthaanDelhi NewsCircular Economy
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