₹768 करोड़ के गोला-बारूद घोटाले की गूंज: एस्टोनिया के रक्षा मंत्री ने दिया इस्तीफा, भारतीय कंपनी पर उठे सवाल
यूक्रेन के लिए गोला-बारूद खरीद में भारी अनियमितताओं का आरोप; भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी को एडवांस भुगतान पर मचा विवाद, कंपनी ने आरोपों से किया इनकार

असद अहमद, दिल्ली दर्पण टीवी
नई दिल्ली/टालिन: यूक्रेन के लिए गोला-बारूद खरीद से जुड़े करीब 70 मिलियन यूरो (लगभग ₹768 करोड़) के विवाद ने एस्टोनिया की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। मामले की राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हैनो पेवकुर ने 2 सितंबर 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
विवाद उस रक्षा खरीद सौदे को लेकर है, जिसमें 2024 में एस्टोनियन सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट्स (ECDI) ने यूक्रेन को भारी तोपों के गोले उपलब्ध कराने के लिए एक अनुबंध किया था। इस परियोजना के लिए धनराशि यूरोपीय संघ के यूरोपियन पीस फैसिलिटी (EPF) से अग्रिम रूप में जारी की गई थी।
जांच में सामने आया कि यह अनुबंध इटली में पंजीकृत Datasel SRL को दिया गया था, जिसे हाल ही में नागपुर स्थित Neco Defence Munitions (Neco Group की सहायक कंपनी) ने अधिग्रहित किया था। आरोप है कि अनुबंध मिलने से पहले न तो Datasel और न ही Neco Defence Munitions के पास आर्टिलरी गोला-बारूद के निर्माण या आपूर्ति का कोई स्थापित रिकॉर्ड था।
बाद में एस्टोनियाई अधिकारियों ने अनुबंध रद्द कर दिया। सरकार का आरोप है कि कंपनी समय पर आपूर्ति नहीं कर सकी और जो सीमित सामग्री भेजी गई, वह गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। इसके बाद एस्टोनिया ने अपनी खरीद प्रक्रिया की आपराधिक जांच शुरू कर दी है और अग्रिम भुगतान की वसूली की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, जायसवाल नेको (Jayaswal Neco) और Datasel ने सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने 58 मिलियन यूरो मूल्य का गोला-बारूद पहले ही आपूर्ति कर दिया था और एस्टोनियाई अधिकारियों ने शुरुआती निरीक्षण के बाद उसे स्वीकार भी किया था। कंपनी का दावा है कि अनुबंध रद्द होने की असली वजह गुणवत्ता नहीं, बल्कि यूरोपीय नियमों में बदलाव और यूरोपीय संघ की फंडिंग समाप्त होना था। इस मामले में कंपनी ने एस्टोनिया सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता (International Arbitration) का भी रुख किया है।
हालांकि पूर्व रक्षा मंत्री हैनो पेवकुर का कहना है कि वे इस अनुबंध की बातचीत में सीधे शामिल नहीं थे, लेकिन राष्ट्रीय ऑडिट कार्यालय की रिपोर्ट में सामने आई गंभीर प्रक्रियागत खामियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
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