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दिल्ली में सिस्टम आईसीयू में : वज़ीरपुर और अशोक विहार में प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता

-व्यवस्था के खिलाफ अब खुद उठना होगा खड़े: 'मेरा इलाका, मेरी ज़िम्मेदारी' के संकल्प से ही टूटेगा भ्रष्ट तंत्र का गुरूर

Rajender Swami
Rajender SwamiDelhi Darpan
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11 सितंबर 2026 · 4:56 am978 व्यूज़अपडेटेड 5:10 amwazirpur,Delhi
व्यवस्था के खिलाफ अब खुद उठना होगा खड़े: 'मेरा इलाका, मेरी ज़िम्मेदारी' के संकल्प से ही टूटेगा भ्रष्ट तंत्र का गुरूर
व्यवस्था के खिलाफ अब खुद उठना होगा खड़े: 'मेरा इलाका, मेरी ज़िम्मेदारी' के संकल्प से ही टूटेगा भ्रष्ट तंत्र का गुरूर — Delhi darpan

-राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण

दिल्ली में सरकार बदलने के बावजूद प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार के चलते ज़मीनी हालात सुधरने के बजाय बदतर हो गए हैं। अवैध निर्माण, अतिक्रमण, गुंडागर्दी और चरमराती कानून व्यवस्था ने पूरी व्यवस्था को बेपटरी कर दिया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर-पश्चिमी दिल्ली का वज़ीरपुर और अशोक विहार इलाका है, जहां सिस्टम पूरी तरह पस्त नजर आ रहा है।

वज़ीरपुर में  सडकों पर कूड़े के ढेर और कचरा खाती गोमाता
वज़ीरपुर में सडकों पर कूड़े के ढेर और कचरा खाती गोमाता— delhi darpan

वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में अवैध निर्माण और अतिक्रमण की भरमार है। शिकायतों के बाद भी प्रशासन और केशवपुरम जोन का बिल्डिंग विभाग आँखें मूंदे बैठा है। यहाँ स्थिति यह है कि बिल्डिंग विभाग में ऐसे लोग तैनात हैं जिन पर न सिर्फ सीबीआई के मामले दर्ज हैं बल्कि वे जेल भी जा चुके हैं। कुछ दिन पहले ही एक जेई (JE) दिलखुश मीणा और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। हैरानी की बात यह है कि कागजों में सील हो चुकी कई इमारतों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण का काम चल रहा है।

दूसरी तरफ, अशोक विहार के दीप चाँद बंधु सेंट्रल मार्केट सहित पूरे इलाके में सड़कों पर अवैध खोखों, रेहड़ियों और पटरियों की बाढ़ आ गई है। मार्केट में अवैध दुकानों पर तो कार्रवाई हुई, लेकिन रसूखदारों के अवैध खोखों को पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। हालात यह हैं कि नकली कागजात तैयार कर सड़कों पर अवैध खोखे लगाए जा रहे हैं। स्थानीय निगम पार्षद वीना असीजा और योगेश वर्मा के विरोध और मीडिया की खबरों के बाद एक नकली कागजों से लगे खोखे को पहले सील किया गया और बाद में हटाया गया, लेकिन इस बड़े फर्जीवाड़े और माफिया तंत्र के पीछे छिपे अधिकारियों की कोई जवाबदेही तय नहीं हुई है। सड़क से लेकर पटरियों तक कार डीलरों का कब्जा है, जिससे रोजाना भयंकर ट्रैफिक जाम रहता है, जिसे पुलिस थाना, डीसीपी ऑफिस और न्याय क्षेत्र से जुड़े अधिकारी रोज देखते हैं।

प्रशासनिक लापरवाही अब लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। अशोक विहार थाने में जल बोर्ड और एमसीडी के खिलाफ मुकदमे तक दर्ज हैं। इसी हफ्ते वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया के बी-61 में प्रशासनिक मिलीभगत की हदें पार हो गईं, जब एक फैक्ट्री को फायदा पहुँचाने के लिए सड़क पर रखा वह कूड़ेदान कंटेनर हटा दिया गया जिसमें झुग्गी बस्ती के लोग कचरा डालते थे। इतना ही नहीं, फैक्ट्री मालिक ने सड़क पर बने सार्वजनिक शौचालय को जेसीबी से तुड़वा दिया। जिस समय यह अवैध कार्रवाई की गई, तब शौचालय के अंदर दो लोग शौच कर रहे थे, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक पर तो मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन उन एमसीडी कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई जिनकी शह पर यह सब हुआ।

सड़क पर पाइप लाइन ,जल बोर्ड की लापरवाही ने राहगीर को ICU में पहुंचा दिया
सड़क पर पाइप लाइन ,जल बोर्ड की लापरवाही ने राहगीर को ICU में पहुंचा दिया— delhi darpan

वज़ीरपुर में दिल्ली जल बोर्ड की कार्यशैली भी कम खतरनाक नहीं है। बिना किसी पूर्व सूचना के सड़कें खोद देना और महीनों तक काम अधूरा छोड़ना यहाँ की आम बात बन गई है। आए दिन सड़कें धंस रही हैं और सीवर ओवरफ्लो होकर गंदा पानी बरसाती नालों में छोड़ा जा रहा है। ऐसे ही एक लापरवाही भरे मामले में सीवर से नाले तक जोड़े गए अवैध पाइप से टकराकर वज़ीरपुर गाँव का रहने वाला युवक सुरेंद्र गंभीर रूप से दुर्घटना का शिकार हो गया, जो अब अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

वज़ीरपुर और अशोक विहार के यह हालात पूरी दिल्ली के प्रशासनिक तंत्र की बानगी भर हैं। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या जनता सिर्फ तमाशबीन बनी रहेगी? नेता और जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त वादे तो बड़े-बड़े करते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आंखें मूंद लेते हैं। आज यह साफ हो चुका है कि 'दिल्ली दर्पण टीवी' जैसी मीडिया संस्था या अकेला कोई संस्थान इस भ्रष्ट तंत्र से अकेले नहीं लड़ सकता। जब तक स्थानीय लोग, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और सामाजिक एक्टिविस्ट खुद आगे आकर इस लड़ाई में शामिल नहीं होंगे, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।

इस तरह घटिया क्वालिटी के काम होते सीवर के काम में।
इस तरह घटिया क्वालिटी के काम होते सीवर के काम में।— Delhi darpan tv

अब समय आ गया है कि इस नाकेबंदी को तोड़ा जाए और हर नागरिक को "मेरा इलाका, मेरी ज़िम्मेदारी" के संकल्प के साथ आगे आना होगा। नेता और अधिकारी भले ही आपकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दें, लेकिन अब हमें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। यदि वज़ीरपुर और पूरी दिल्ली को इस नरक से बचाना है, तो जनता को जागरूक होकर खुद प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ सड़कों पर उतरना होगा।

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