अलवर भूमि घोटाला: मृत लोगों के नाम पर बने फर्जी पट्टे, पूर्व सरपंच और उप-सरपंच ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप
अलवर के देसूला गांव में करीब 100 करोड़ रुपये की चारागाह भूमि पर फर्जी पट्टे जारी करने के मामले में पूर्व सरपंच और उप-सरपंच ने एक-दूसरे पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।

राजस्थान के अलवर जिले के देसूला गांव में करीब 100 करोड़ रुपये की चारागाह भूमि पर फर्जी पट्टे जारी कर करोड़ों रुपये का लोन लेने का मामला सामने आया है। इस मामले में मृत व्यक्तियों के नाम पर भी पट्टे जारी किए गए हैं, जिनका पंचायत स्तर पर कोई रिकॉर्ड नहीं है। प्रशासन ने शुरुआती जांच के बाद हाल ही में ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) को निलंबित कर दिया था।
अब इस मामले में पूर्व सरपंच सावित्री देवी और उनके पोते दीपक ने सोमवार को मीडिया के सामने आकर पूर्व उप-सरपंच बलदेव कृष्ण मल्होत्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सावित्री देवी का दावा है कि पूर्व उप-सरपंच ने उनकी मुहर चुराकर और फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर ये पट्टे जारी किए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अपने हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
पूर्व सरपंच के पोते दीपक ने आरोप लगाया कि पूर्व उप-सरपंच ने जेल भिजवाने की धमकी देकर उनसे 70 हजार रुपये ऐंठे थे। उधर, जांच में सामने आया है कि अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच जारी किए गए 54 विवादित पट्टों में से सात पट्टे निवर्तमान सरपंच सावित्री देवी के बेटों, पोतों और पुत्रवधू के नाम पर हैं। पंचायत रिकॉर्ड में साल 2020 के बाद से इन पट्टों से संबंधित कोई फाइल उपलब्ध नहीं है।
दस्तावेजों में गड़बड़ी का आलम यह है कि साल 2002 में दिवंगत हो चुके बूटा सिंह के नाम पर भी पट्टा जारी कर दिया गया। बूटा सिंह पूर्व उप-सरपंच बलदेव मल्होत्रा के पिता थे, जिन्हें एक अन्य पट्टे में बलदेव का पुत्र दर्शा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, बिना किसी आवेदन या फीस जमा किए ही बैकडेट में ये पट्टे तैयार कर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से इनकी रजिस्ट्रियां करा ली गईं।
दूसरी ओर, गड़बड़ी की शिकायत करने वाले पूर्व उप-सरपंच बलदेव कृष्ण मल्होत्रा ने जिला कलेक्टर को नया परिवाद सौंपा है। मल्होत्रा का आरोप है कि उन पर शिकायत वापस लेने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को झूठे मामले में फंसाने के लिए उनके नाम पर भी फर्जी पट्टे तैयार किए गए हैं।
इस विवादित सरकारी और गोचर भूमि पर अलवर यूआईटी (नगर विकास न्यास) की नई आवासीय योजना प्रस्तावित है। इसी भूमि को हड़पने के लिए भू-माफिया द्वारा फर्जी पट्टे बनाकर बैंकों से लोन उठाए जाने की बात सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए 17 जुलाई को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित वीडीओ को निलंबित कर दिया था।
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टिप्पणियाँ
3संतुलित, अच्छी तरह प्रमाणित रिपोर्टिंग। इसीलिए मैं आज भी ख़बरों के लिए भुगतान करता हूँ।
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आगे क्या होगा वाला हिस्सा वही है जिसे सब छोड़ेंगे और सबको पढ़ना चाहिए।