दिल्ली विश्वविद्यालय में 40 हजार छात्रों के लिए बनेंगे नए हॉस्टल, 12,000 करोड़ के प्रस्ताव पर 13 अक्टूबर को आपात बैठक
दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद 40,000 छात्रों के लिए नए छात्रावास और तीन पुराने हॉस्टलों के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव पर विचार करेगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग 40 हजार विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने और तीन पुराने हॉस्टलों का पुनर्निर्माण करने के उद्देश्य से 12,000 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर विचार करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 13 अक्टूबर को कार्यकारी परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई है।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, वित्त समिति ने शुक्रवार को इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी। वित्त समिति से हरी झंडी मिलने के बाद अब इसे औपचारिक विचार-विमर्श और अनुमोदन के लिए विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, कार्यकारी परिषद के समक्ष रखा जा रहा है।
डीयू के कुलसचिव विकास गुप्ता द्वारा जारी एक नोटिस में कहा गया है कि वित्त समिति की सिफारिशों पर निर्णय लेने के लिए मंगलवार को कार्यकारी परिषद की आपात बैठक आयोजित होगी। विश्वविद्यालय की भवन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर बलराम पाणी ने बताया कि कार्यकारी परिषद से स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा।
प्रस्ताव के अनुसार, विश्वविद्यालय में नए आवासीय ढांचे का विकास करने के साथ-साथ परिसर के तीन सबसे पुराने छात्रावासों का पुनर्विकास किया जाएगा। इनमें जुबली हॉल, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स हाउस और पोस्टग्रेजुएट मेन्स हॉस्टल शामिल हैं। प्रोफेसर पाणी ने स्पष्ट किया कि इन पुराने छात्रावासों को व्यापक संरचनात्मक मरम्मत की आवश्यकता है और इनके आसपास उपलब्ध खाली जमीन पर नए निर्माण की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
परिसर में छात्रावास विस्तार की यह पहल हालिया हादसे के बाद तेजी से आगे बढ़ी है। बीते 6 सितंबर को सत्य निकेतन क्षेत्र में छात्रों के पेइंग गेस्ट के रूप में इस्तेमाल हो रही एक पांच मंजिला इमारत गिर गई थी, जिसमें डीयू के कई विद्यार्थियों की मौत हो गई थी।
इस दुखद घटना के बाद विश्वविद्यालय और उसके संबद्ध कॉलेजों में छात्रावासों की भारी कमी का संकट एक बार फिर सतह पर आ गया था। विश्वविद्यालय में पर्याप्त आवासीय व्यवस्था न होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को निजी पेइंग गेस्ट और किराए के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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