चुनाव से पहले DUSU चुनाव पर हाईकोर्ट की एंट्री, लिंगदोह समिति के नियमों को लेकर उठे सवाल
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 से पहले चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है. लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दायर याचिका में चुनाव पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है.हाईकोर्ट बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगा.यदि अदालत रोक लगाती है तो 18 सितंबर को प्रस्तावित मतदान प्रभावित हो सकता है, जबकि राहत नहीं मिलने की स्थिति में चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार कराए जाएंगे.

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 अब सिर्फ कैंपस की राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है.मतदान से ठीक पहले यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की गई है, जिसमें चुनाव पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है. अब इस याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई करेगा.
क्या है पूरा विवाद?
पिछले कई वर्षों से DUSU चुनावों के दौरान पोस्टर, बैनर, दीवारों पर पेंटिंग, अत्यधिक चुनावी खर्च और राजनीतिक दलों के बढ़ते प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं. इन शिकायतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित लिंगदोह समिति ने छात्रसंघ चुनावों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे.इन नियमों का उद्देश्य छात्र राजनीति में पारदर्शिता लाना, चुनावी खर्च को सीमित रखना और शैक्षणिक माहौल को प्रभावित होने से बचाना था.
13 अगस्त को जारी हुआ था चुनाव कार्यक्रम
दिल्ली विश्वविद्यालय ने 13 अगस्त 2026 को DUSU चुनाव का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया था. इसके साथ चुनाव कार्यक्रम भी घोषित किया गया और स्पष्ट किया गया कि इस बार लिंगदोह समिति के सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा.विश्वविद्यालय ने निर्देश दिए थे कि कैंपस में बड़े-बड़े बैनर, फ्लेक्स, प्रिंटेड पोस्टर और अवैध होर्डिंग नहीं लगाए जाएंगे. प्रचार केवल निर्धारित स्थानों पर ही किया जाएगा. चुनावी खर्च की सीमा तय रहेगी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी.
चुनाव प्रचार के दौरान उठे सवाल
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों की सूची जारी हुई और दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में चुनाव प्रचार तेज हो गया. ABVP, NSUI, AISA, SFI समेत सभी प्रमुख छात्र संगठन मैदान में उतर गए. कॉलेज परिसरों में जनसंपर्क अभियान, सभाएं और छात्र संवाद कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने लगे.इसी दौरान कई छात्र संगठनों पर लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगने लगे. सोशल मीडिया पर कैंपस में लगे पोस्टरों, बैनरों और दीवारों पर प्रचार सामग्री की तस्वीरें वायरल हुईं.आरोप लगाए गए कि कई जगहों पर निर्धारित सीमा से अधिक संसाधनों का इस्तेमाल किया गया और विश्वविद्यालय के निर्देशों का पालन नहीं हुआ.
हाईकोर्ट में क्या मांग की गई है?
इन्हीं आरोपों के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि जब चुनाव प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं चल रही है, तो ऐसे में चुनाव कराना उचित नहीं होगा. इसलिए पहले लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए और उसके बाद ही मतदान कराया जाए.
क्या चुनाव पर लगेगी रोक?
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है. अदालत ने केवल याचिका पर सुनवाई के लिए बुधवार की तारीख तय की है.यदि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट चुनाव पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश देता है, तो 18 सितंबर को प्रस्तावित मतदान प्रभावित हो सकता है. वहीं यदि अदालत याचिका खारिज कर देती है या कोई अंतरिम राहत देने से इनकार करती है, तो चुनाव पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे.
छात्रों और विश्वविद्यालय की नजरें अदालत पर
DUSU चुनाव को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर हैं. एक ओर हजारों छात्र मतदान की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव का भविष्य अब हाईकोर्ट के फैसले पर भी निर्भर करता दिखाई दे रहा है.बुधवार की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं. अदालत का फैसला यह तय करेगा कि DUSU चुनाव निर्धारित समय पर होंगे या चुनाव प्रक्रिया में कोई नया मोड़ आएगा.

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