ग्रेटर नोएडा के सात गांवों के सरकारी स्कूलों का तीन करोड़ रुपये से होगा कायाकल्प, काम शुरू
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कायाकल्प योजना के तहत सात गांवों के जर्जर सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्धार के लिए तीन करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की है।

ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के सात गांवों में स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कायाकल्प योजना के तहत कार्य शुरू कर दिया है। इस जीर्णोद्धार परियोजना पर प्राधिकरण लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जर्जर हो चुके स्कूल भवनों का नवीनीकरण कर बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली कायाकल्प योजना के अंतर्गत यह विकास कार्य चरणबद्ध तरीके से कराया जा रहा है। परियोजना के तहत चयनित गांवों के विद्यालयों में सुंदरीकरण, निर्माण और मरम्मत की गतिविधियां शुरू की गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक नागेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि बिरौंडा, खानपुर, गिरधरपुर, घंघौला, सिरसा, सलेमपुर गुर्जर और बल्ला की मढ़ैया गांवों के स्कूलों में विकास कार्य शुरू करा दिए गए हैं। इन सभी स्कूलों में आवश्यकतानुसार ढांचागत बदलाव किए जा रहे हैं। आने वाले कुछ महीनों में इन विद्यालयों की सूरत पूरी तरह बदली हुई नजर आएगी।
स्कूलों में लगातार बढ़ रही विद्यार्थियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही पुराने भवनों की मरम्मत, छतों तथा फर्श का सुदृढ़ीकरण और पूरी इमारत की रंगाई-पुताई का काम भी इस परियोजना में शामिल है। इन सुधारों से कक्षाओं में बैठने की क्षमता और पठन-पाठन का स्तर बेहतर होगा।
छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मूलभूत सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए परिसरों में आरओ सिस्टम और नए हैंडपंप लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा बाहरी तत्वों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्कूल परिसरों की चारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा है।
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टिप्पणियाँ
4आगे क्या होगा वाला हिस्सा वही है जिसे सब छोड़ेंगे और सबको पढ़ना चाहिए।
आख़िरकार, ऐसी कवरेज जो पाठक की समझ का सम्मान करती है। धन्यवाद।
क्षेत्रीय असर पर थोड़ा और होता तो अच्छा था, पर कुल मिलाकर मज़बूत लेख।
संतुलित, अच्छी तरह प्रमाणित रिपोर्टिंग। इसीलिए मैं आज भी ख़बरों के लिए भुगतान करता हूँ।