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नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो विस्तार को गति, पीआईबी के समक्ष आज एनएमआरसी देगा प्रस्तुतीकरण

नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 तक प्रस्तावित 7.5 किलोमीटर लंबे एक्वा लाइन विस्तार से क्षेत्र के 5 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा फायदा।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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22 जुलाई 2026 · 4:33 pm490 व्यूज़
नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो विस्तार को गति, पीआईबी के समक्ष आज एनएमआरसी देगा प्रस्तुतीकरण
नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो विस्तार को गति, पीआईबी के समक्ष आज एनएमआरसी देगा प्रस्तुतीकरणJagran

नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) की एक्वा मेट्रो विस्तार परियोजना को लेकर आज पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) में महत्वपूर्ण प्रस्तुतीकरण दिया जा रहा है। एनएमआरसी के प्रबंध निदेशक कृष्णा करुणेश इस बैठक में परियोजना की उपयोगिता और वित्तीय पहलुओं की जानकारी देंगे। इस चरण की मंजूरी के साथ ही नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 तक मेट्रो निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर की कुल लंबाई 7.5 किलोमीटर होगी और यह पूरी तरह से एक्सटेंशन लाइन के रूप में विकसित की जाएगी। इस रूट पर कुल पांच मेट्रो स्टेशन बनाने का निर्णय लिया गया है, जिनमें सेक्टर-61, 70, 122, 123 और ग्रेटर नोएडा का सेक्टर-4 (किसान चौक के पास) शामिल हैं।

इस मेट्रो परियोजना की अनुमानित लागत 1,500 करोड़ रुपये से अधिक है। निर्माण कार्य पर होने वाला खर्च इक्विटी मॉडल पर आधारित होगा, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार, नोएडा प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण संयुक्त रूप से वित्तीय योगदान देंगे।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की बहुमंजिला सोसायटियों में रहने वाले 5 लाख से अधिक निवासियों को इस लाइन के बनने से सीधा लाभ पहुंचेगा। इस रूट के संचालन से गौड़ चौक और नोएडा-ग्रेटर नोएडा वेस्ट मार्ग पर रोजाना लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी।

निर्माण पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगने का अनुमान है। यह नया कॉरिडोर गाजियाबाद से जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक प्रस्तावित आरआरटीएस नेटवर्क से भी कनेक्ट होगा, जिससे दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच एक एकीकृत परिवहन लूप तैयार हो जाएगा।

एनएमआरसी के प्रबंध निदेशक के अनुसार मेट्रो परियोजनाएं केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आती हैं और एनएमआरसी भारत सरकार का उपक्रम है। पीआईबी के समक्ष प्रस्तुतीकरण के बाद आवश्यक अनुमतियां मिलते ही टेंडर और निर्माण संबंधी प्रक्रियाएं शुरू कर दी जाएंगी।

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