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जेएनयू में आइसा कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल 23वें दिन समाप्त, विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज ने जूस पिलाकर खुलवाया अनशन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्र अधिकारों को लेकर अनशन पर बैठे तीन आइसा कार्यकर्ताओं ने विपक्षी सांसदों और नागरिक समाज के आश्वासन के बाद सोमवार को अपनी भूख हड़ताल खत्म की।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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20 जुलाई 2026 · 11:17 am201 व्यूज़
जेएनयू में आइसा कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल 23वें दिन समाप्त, विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज ने जूस पिलाकर खुलवाया अनशन
जेएनयू में आइसा कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल 23वें दिन समाप्त, विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज ने जूस पिलाकर खुलवाया अनशनDainik Bhaskar

नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन छात्र कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल सोमवार को खत्म हो गई। पिछले 23 दिनों से जारी इस अनशन को समाप्त कराने के लिए देश के कई विपक्षी सांसद, नागरिक समाज के सदस्य और बुद्धिजीवी विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों के गिरते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उनसे हड़ताल वापस लेने की अपील की।

छात्रों से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा, अभिनेता प्रकाश राज, अभिनेत्री शबाना आजमी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल थे। इनके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अमराराम और राजाराम ने भी अनशन स्थल का दौरा किया। इन सभी दिग्गज हस्तियों ने तीनों अनशनकारी छात्रों को अपने हाथों से जूस पिलाकर उनका 23 दिनों से चला आ रहा अनशन समाप्त करवाया।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आंदोलनकारी छात्रों को भरोसा दिलाया कि छात्र अधिकारों की इस लड़ाई को अब संसद के आगामी सत्र और सड़कों पर संयुक्त रूप से लड़ा जाएगा। उन्होंने छात्रों से अपने आंदोलन के तरीके में बदलाव करने की अपील की। नेताओं का कहना था कि छात्रों को भूख हड़ताल के बजाय संघर्ष के दूसरे रास्तों को अपनाना चाहिए क्योंकि देश को उनके जीवन और इस वैचारिक लड़ाई की जरूरत है।

आइसा के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि केवल अनशन समाप्त हुआ है, लेकिन छात्र अधिकारों के लिए उनका संघर्ष थमेगा नहीं। उनका कहना है कि इन तीन छात्रों ने 23 दिनों तक बिना अन्न ग्रहण किए देश के सामने एक मिसाल पेश की है। संगठन के अनुसार, आंदोलन का स्वरूप जरूर बदलेगा, लेकिन उनकी मूल मांगें वही रहेंगी।

इस दौरान राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि अब यह लड़ाई केवल इन तीन छात्रों तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस संघर्ष को संसद के भीतर और सड़कों पर पूरे दमखम के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों को विश्वास दिलाया कि उनकी मांगों को आगामी संसदीय सत्र में पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।

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