मेरठ में किसानों और प्रशासन की वार्ता में तल्खी, फसल बर्बादी के मुद्दे पर भाकियू नेता ने जताई नाराजगी
मेरठ कलेक्ट्रेट पर धरने के दौरान अधिकारियों के कथित रवैये पर भाकियू जिलाध्यक्ष ने विरोध जताया, तीसरे दौर की वार्ता में बनी सहमति।
मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के धरने के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच वार्ता में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भाकियू नेताओं ने अधिकारियों पर किसानों की फसल बर्बादी के मुद्दे पर गैर-गंभीर रुख अपनाने का आरोप लगाया। लगभग डेढ़ घंटे तक चली बैठक में दो बार गतिरोध बना, जिसके बाद तीसरे दौर की चर्चा में सहमति बनने पर धरना समाप्त किया गया।
कलेक्ट्रेट में किसानों का धरना सुबह 11 बजे से शाम करीब 6:30 बजे तक चला। मेरठ के जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के कार्यालय पहुंचने पर किसानों को वार्ता के लिए बुलाया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि डीएम खुद आकर उन्हें आमंत्रित करें। इसके बाद जिलाधिकारी खुद किसानों के बीच पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल को कार्यालय के अंदर वार्ता के लिए ले गए।
बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद भाकियू के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी नाराज होकर डीएम कार्यालय से बाहर आ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक किसान की 80 कुंतल सरसों खराब होने का मामला उठाने पर जिलाधिकारी और एसएसपी मुस्कुरा रहे थे। किसान नेता ने कहा कि अन्नदाता के नुकसान पर अधिकारियों का ऐसा रवैया स्वीकार्य नहीं है और इस स्थिति में बातचीत आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
वहां मौजूद अन्य अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बाद किसान नेता दोबारा वार्ता में शामिल हुए। अनुराग चौधरी ने भीतर जाकर अधिकारियों के सामने इस बात पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद माहौल शांत हुआ और प्रशासनिक स्तर पर दोबारा बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जिसके बाद दोनों पक्षों में सहमति बन सकी।
धरना खत्म होने के पश्चात मेरठ के डीएम डॉ. वीके सिंह और एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति किसानों के बीच पहुंचे। इस दौरान संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता बाबा मेजर सिंह चिंदोड़ी ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और किसानों के हित में काम करने की बात कहते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।
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