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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली कूच: 21 जुलाई को किसान घाट पर महापंचायत

प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले दिल्ली के किसान घाट पर जुटेंगे देश भर के किसान संगठन।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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21 जुलाई 2026 · 2:46 am4.1 हज़ार व्यूज़
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली कूच: 21 जुलाई को किसान घाट पर महापंचायत
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली कूच: 21 जुलाई को किसान घाट पर महापंचायतIndia Today

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब से किसानों का एक बड़ा जत्था दिल्ली के लिए रवाना हो गया है। यह किसान आगामी 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित होने वाली महापंचायत में हिस्सा लेंगे। इस महापंचायत का आह्वान 'देश बचाओ मोर्चा' द्वारा किया गया है।

आयोजकों का दावा है कि इस देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में देश भर से लगभग 550 किसान संगठन और सामाजिक संस्थाएं भाग लेंगी। ब्यास में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (पंजाब) के नेता जर्मनजीत सिंह बंडाला ने आरोप लगाया कि इस प्रस्तावित व्यापार समझौते का भारतीय किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।

किसान नेता ने दावा किया कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों और वहां के किसानों को फायदा पहुंचाना है, जबकि भारत के छोटे और सीमांत किसानों के हितों की इसमें अनदेखी की जा रही है। उन्होंने दोनों देशों के कृषि क्षेत्र की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका में खेती बड़े पैमाने पर हजारों एकड़ में की जाती है और वहां की सरकार भारी सब्सिडी देती है।

इसके विपरीत, भारत में अधिकांश किसानों के पास केवल दो से ढाई एकड़ जमीन है और उन्हें मिलने वाली वित्तीय सहायता भी बहुत कम है। बंडाला ने दावा किया कि यदि इस समझौते के तहत अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं, तो भारतीय किसानों के लिए उनसे मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा और उनकी आय में भारी गिरावट आएगी।

किसान नेताओं का आरोप है कि पिछली सरकारों ने कृषि क्षेत्र को अत्यधिक विदेशी प्रभाव से बचाकर रखा था, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में इस समझौते को आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि इस समझौते का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी छोटे व्यवसायों और रोजगार के अवसरों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

बंडाला ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने किसानों को दिल्ली के निर्धारित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से रोका, तो वे वहीं शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होकर अपनी आवाज उठाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह विरोध प्रदर्शन केवल एक शुरुआत है और यदि केंद्र सरकार ने इस प्रस्तावित समझौते को रद्द नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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