बाल्टिक सागर में आवाजाही रोकी तो होर्मुज जैसे बनेंगे हालात: पुतिन ने दी यूरोप को चेतावनी
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिशों पर यूरोप को गंभीर नतीजों की चेतावनी दी है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को आगाह किया है कि मॉस्को के साथ टकराव बढ़ाना उनके लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने का प्रयास किया गया, तो वहां भी होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे हालात उत्पन्न हो सकते हैं।
राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस, यूरोप के साथ किसी तरह का युद्ध नहीं चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई देश जानबूझकर टकराव की स्थिति पैदा करता है, तो उसे इसके परिणामों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि तनाव बहुत अधिक बढ़ने पर किसी भी पक्ष की जीत नहीं होगी।
संबोधन के दौरान पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के साथ हाल ही में हुई फोन वार्ता का भी बचाव किया। यूरोप के कुछ देशों द्वारा इस बातचीत पर आपत्ति जताए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि रिश्तों में सुधार के लिए संवाद जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि मॉस्को यूरोपीय देशों के साथ संबंध बेहतर करने की दिशा में बातचीत के लिए तैयार है, जबकि पोलैंड जैसे कुछ देश मानते हैं कि इस संवाद से यूरोप की एकजुटता कमजोर होती है।
बाल्टिक सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ने का एक बड़ा कारण फिनलैंड और स्वीडन का नाटो में शामिल होना भी है। इस विस्तार के बाद बाल्टिक सागर के करीब 90 प्रतिशत तटीय हिस्से पर नाटो देशों का नियंत्रण हो चुका है। रूस को अंदेशा है कि यूरोपीय देश सेंट पीटर्सबर्ग और कलिनिनग्राद जैसे उसके प्रमुख व्यापारिक समुद्री रास्तों की पूरी तरह से नाकाबंदी कर सकते हैं।
इसके अलावा पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस बिना औपचारिक दस्तावेजों और पुराने जहाजों के जरिए बाल्टिक सागर से तेल का निर्यात कर रहा है। यूरोपीय देश सुरक्षा और पर्यावरण का हवाला देकर इन जहाजों को रोकने और उनकी जांच करने की कोशिश में हैं, जिसे रूस अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा हमला बता रहा है। वहीं यूक्रेन युद्ध के दौरान समुद्र के नीचे मौजूद इंटरनेट केबल और गैस पाइपलाइनों के क्षतिग्रस्त होने के बाद से दोनों पक्षों के बीच जासूसी के आरोपों को लेकर सैन्य तनाव भी गहराया है।
बाल्टिक सागर के रास्ते रूस हर साल करीब 5 लाख 70 हजार करोड़ रुपये का लगभग 40 प्रतिशत समुद्री तेल वैश्विक बाजारों में भेजता है। यदि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन में कोई रुकावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 690 रुपये से लेकर 1,300 रुपये प्रति बैरल तक का तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
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