जंतर-मंतर प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने पेलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई पर दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की जांच रिपोर्ट दो हफ्ते में पेश करने का निर्देश दिया है।

उच्चतम न्यायालय ने जंतर-मंतर पर जुलाई माह में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बर्बरता और पेलेट गन के इस्तेमाल की जांच कर रही उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीईसी) को दो सप्ताह के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को समिति के कामकाज के लिए कार्यालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा है।
शीर्ष अदालत कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 20 से 25 जुलाई के बीच आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि दशहरा अवकाश समाप्त होने के तुरंत बाद इस मामले पर दोबारा सुनवाई की जाएगी।
न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि समिति के लिए जरूरी संसाधन युद्धस्तर पर जुटाए जाएं। इसमें राउज एवेन्यू स्थित कार्यालय, एनआईसी द्वारा तैयार किया जाने वाला पोर्टल और आवश्यक सर्वर शामिल हैं। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने वालों और साक्ष्य देने वालों की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहे।
अदालत की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका गुसाईं ने पीठ को बताया कि समिति का पोर्टल मंगलवार तक तैयार हो जाएगा और सदस्य सचिव की नियुक्ति की जा चुकी है। उन्होंने जानकारी दी कि पोर्टल शुरू होते ही सभी पक्षों से शिकायतें और सुझाव प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किए जाएंगे।
उच्चतम न्यायालय ने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 18 अगस्त को इस समिति का गठन किया था। समिति को मुख्य रूप से चार मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और आंसू गैस के कथित इस्तेमाल की जांच शामिल है।
इसके अलावा समिति महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुए कथित उत्पीड़न, घायल प्रदर्शनकारियों को चिकित्सीय सहायता और मुआवजे, तथा ड्यूटी के दौरान घायल हुए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों की स्थिति की भी पड़ताल कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति का उद्देश्य पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ न्यायालय की सहायता करना है, न कि किसी एक पक्ष का समर्थन करना।
गौरतलब है कि तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों ने जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन किया था। मंत्री के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को यह आंदोलन समाप्त घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई और पुलिसकर्मियों को लगी चोटों को लेकर अदालत में याचिकाएं दायर की गई थीं।
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