अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी चुनाव: तटस्थ दिग्गजों ने अनिल गुप्ता के खिलाफ खोला मोर्चा, पवन अग्रवाल के समर्थन में उतरा समाज
अशोक विहार की अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी के चुनाव में बड़ा राजनीतिक मोड़ आया है। समाज के वरिष्ठ और तटस्थ माने जाने वाले नंदकिशोर अग्रवाल, अरुण बंसल, बृजमोहन गर्ग और सुरेंद्र पाल गुप्ता ने वर्तमान प्रधान अनिल गुप्ता की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पवन अग्रवाल के नेतृत्व वाले 'सद्भावना ग्रुप' का समर्थन किया है। वरिष्ठों ने संविधान में बदलाव, अधूरे हॉस्पिटल प्रोजेक्ट और ट्रस्टियों की उपेक्षा जैसे मुद्दे उठाते हुए 2 अगस्त को बदलाव के पक्ष में मतदान की अपील की।

तानाशाही के खिलाफ आगे आए समाज के तटस्थ दिग्गज: नंदकिशोर, अरुण बंसल, बृजमोहन गर्ग और सुरेंद्र पाल गुप्ता ने फूंका बदलाव का बिगुल अशोक विहार, दिल्ली (विशेष संवाददाता)। अशोक विहार की प्रतिष्ठित 'अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी' के आगामी चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक हलचल देखने को मिल रही है। समाज के वे निष्पक्ष और परम आदरणीय दिग्गज जो आमतौर पर सोसाइटी की आंतरिक राजनीति से दूरी बनाकर रखते हैं, वर्तमान प्रधान अनिल गुप्ता 'घी वाले' की कार्यशैली और तानाशाही रवैये से आहत होकर अब सीधे मैदान में उतर आए हैं।
'दिल्ली दर्पण टीवी' से खास बातचीत में समाज की प्रमुख हस्तियों—नंदकिशोर अग्रवाल, अरुण बंसल, बृजमोहन गर्ग और सुरेंद्र पाल गुप्ता ने अनिल गुप्ता की मंशा पर कड़ा एतराज जताते हुए खुल्लम-खुल्ला बदलाव का ऐलान कर दिया है।
"1200 ट्रस्टियों की धरोहर को किसी एक व्यक्ति की बंधक नहीं बनने देंगे" हमेशा समाज में तटस्थ भूमिका निभाने वाले इन दिग्गजों की तिलमिलाहट उस वक्त खुलकर सामने आई जब वर्तमान नेतृत्व ने सत्ता में बने रहने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और संविधान की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया। इन प्रमुख समाजसेवियों ने हुंकार भरते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा—
"50 वर्षों के परिश्रम से खड़ी की गई 1200 ट्रस्टियों की यह संस्था किसी एक व्यक्ति या परिवार की निजी जागीर नहीं है। हम समाज की इस ऐतिहासिक धरोहर को किसी के आगे बंधक नहीं बनने देंगे।"
20 साल से सत्ता का मोह और हॉस्पिटल की नाकामी पर घेरा दिल्ली दर्पण टीवी पर अपनी बेबाक राय रखते हुए इन दिग्गजों ने अनिल गुप्ता के 20 साल के चुनावी इतिहास और उनकी असफलताओं का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया:
संविधान में बार-बार मनमाना संशोधन: पहले 2 साल का कार्यकाल पूरा न कर पाने पर उसे बढ़ाकर 3 साल किया गया, और अब तीसरी बार कुर्सी हथियाने के लिए "लगातार दो बार से ज्यादा पद पर न रहने" (Capping) के नियम को ही खत्म कर दिया गया।
5 साल में भी हॉस्पिटल अधूरा: लगातार 5 साल सत्ता में रहने के बावजूद समाज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट 'हॉस्पिटल' आज भी अधूरा पड़ा है। इसके बावजूद फिर से 3 साल मांगना और शी जिनपिंग की तर्ज़ पर कुर्सी से चिपके रहना संस्था के स्वाभिमान के खिलाफ है।
ट्रस्टियों का अपमान: पिछले 3 सालों में न कोई कार्यकारी बैठक हुई और न AGM। अंत में महज 15 मिनट की औपचारिक बैठक बुलाकर 1200 ट्रस्टियों के सम्मान को ठेस पहुँचाई गई।
'कठपुतली' वाले बयान पर समाज के अगुआ का तीखा पलटवार अनिल गुप्ता द्वारा समाज के वरिष्ठों पर लगाए गए इस आरोप पर कि "कुछ लोग पवन अग्रवाल को कठपुतली प्रधान बनाकर समाज को बांटना चाहते हैं", इन प्रतिष्ठित नेताओं ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह बयान समाज का अपमान है और अपनी विफलताओं को छिपाने की नाकाम कोशिश है।
'सद्भावना ग्रुप' के साथ एकजुट हुआ समाज इन वरिष्ठों के खुलकर सामने आने के बाद अब चुनाव का रुख पूरी तरह बदल गया है। समाज के इन निष्पक्ष मार्गदर्शकों ने श्री पवन अग्रवाल के नेतृत्व वाले 'सद्भावना ग्रुप' (चुनाव चिन्ह: उगता सूरज) का पूर्ण समर्थन करते हुए सभी 1200 ट्रस्टियों से 2 अगस्त को बदलाव के पक्ष में मतदान करने की अपील की है।
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