रोहतक एमडीयू में 10 फीसदी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ छात्रों का धरना, वीसी दफ्तर के घेराव की चेतावनी
महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में वार्षिक शुल्क वृद्धि वापस लेने और बीपीएल छात्रों को हॉस्टल फीस में छूट देने की मांग पर अड़े छात्र।

हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में 10 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी के फैसले के खिलाफ विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। मिशन इक्वेलिटी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के बैनर तले छात्र पिछले तीन दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि आंदोलन के तीन दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने उनसे बातचीत की पहल नहीं की है।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो वे कुलपति कार्यालय का घेराव करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस घेराव से उत्पन्न होने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। इस आंदोलन को परिसर के अन्य सामान्य छात्रों का भी समर्थन मिल रहा है।
धरने की अगुवाई कर रहे छात्र संगठन के जनरल सेक्रेटरी नकुल ने बताया कि वर्ष 2022 में यूनिवर्सिटी की ईसी बैठक के दौरान हर साल 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने का नियम लागू किया गया था। इस व्यवस्था के कारण भारी-भरकम फीस वाले पाठ्यक्रमों का खर्च प्रतिवर्ष अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए शिक्षा हासिल करना कठिन होता जा रहा है। छात्रों की मांग है कि इस नियम को तुरंत रद्द किया जाए।
छात्रों की दूसरी प्रमुख मांग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की तर्ज पर एमडीयू में भी बीपीएल परिवारों के विद्यार्थियों को हॉस्टल फीस में 50 प्रतिशत की छूट देने की है। इसके अलावा छात्रों ने आरोप लगाया कि 22 जुलाई को जारी की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में विभागों के अनुसार स्पष्ट पद नहीं दर्शाए गए हैं और प्रोफेसरों की भर्ती में आरक्षण नियमों का सही से पालन नहीं हो रहा है।
यूनिवर्सिटी के बजट पर सवाल उठाते हुए नकुल ने कहा कि फाइनेंस ऑफिसर के साथ हुई बैठक में यह सामने आया कि संस्थान को 135 करोड़ रुपये की सरकारी ग्रांट मिलती है, जबकि सैलरी मद में 250 करोड़ रुपये खर्च दिखाए जा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब विभागों में प्राध्यापकों की भारी कमी है, तब यह बजट कहां खर्च किया जा रहा है, इसकी स्पष्टता होनी चाहिए।
संगठन के उपप्रधान ईश्वर ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों को वित्तीय अनुदान देने के बजाय सेल्फ फाइनेंस मॉडल की तरफ धकेल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र अपने अधिकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर तक संघर्ष कर रहे हैं और जब तक एमडीयू प्रशासन उनकी तीनों प्रमुख मांगें स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक रोहतक में यह धरना जारी रहेगा।
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