Gyan Publishing House में पहुंचे विदेशी ग्राहक

माइकल विब्स और ऐना ताल ने जब ज्ञान पब्लिशिंग हाउस में कदम रखा तो तब वे इस रोमांच से भरे हुए थे कि आज तक इतनी दूर विदेशों वे में चमड़े के खूबसूरत लिहाफों से सजे जिन किताबों को उनके पाठकों तक पहुंचाते हैं वह बनती कैसे हैं। ठीक ऐसी ही गुदगुदी पब्लिशिंग हाउस के अंदर भी सभी स्टाफ को हो रही थी, क्योंकि वे भी पहली बार उन लोगों से मिल रहे थे जो उनके मेहनत की सही कीमत दिलाते हैं। एडिटोरियल, प्रिंटिंग, बाइंडिंग, और कवर पर गोल्डन लेटर्स से लिखाई हर एक चीज को उन्होंने बारीकी से देखा और समझने की कोशिश की।यह देख कर माइकल काफी प्रभावित हुए।

माइकल ने पब्लिशिंग हाउस के कर्मचारियों को यह सलाह भी दिया कि वे सलाह तो लें मगर उसे अपने तरीके से आजमाएं, साथ ही हमेशा कुछ नया सीखने की कोशिश करें। यहां मिले आतिथ्य से ऐना इतनी अभिभूत हुई कि उसे शब्द नहीं दे पाईं। पब्लिशिंग हाउस के लोगों से मिल कर वह काफी रोमांचित हो गईं।

ज्ञान पब्लिशिंग हाउस ने पिछले पांच साल में दुनिया भर की करीब एक लाख सदियों पुरानी किताबों का एंटीक लुक में प्रकाशन किया है। वहीं इनका लक्ष्य है कि ये दुनिया भर के ऐसे दो करोड़ किताबों का प्रकाशन करें । लेकिन इसके लिए इन किताबों के लिए खरीददारों का होना बहुत जरूरी है। इसलिए पब्लिशिंग हाउस के प्रमुख ABE की तारीफ करते नहीं थकते।

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