डिम्पल भारद्वाज, संवाददाता
नई दिल्ली।। दिल्ली नगर निगम में कर्मचारी अपने वेतन के लिए पिछले 7 जनवरी से हड़ताल कर रहे हैं। इस हड़ताल में निगम के सभी महकमें के कर्मी शामिल हैं फिर चाहे वह सफाई कर्मचारी हो, टीचर्स या फिर मलेरिया विभाग के सीएफडब्यू कर्मचारी हो, इतना नहीं हड़ताल का समर्थन करने के लिये नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर्स और पेशन धारक भी शामिल हैं। सभी का आक्रोश है की नगर निगम राजनीति करने लिए हमारी तनख्वाह के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
बता दें की इस तरह की हड़ताल समूची दिल्ली में देखने को मिल रही है। कुछ ऐसा ही नज़ारा उत्तरी दिल्ली के उपायुक्त कार्यालय करोल बाग क्षेत्र में भी देखने को मिला जहा लगभग सभी यूनियन के लोगों ने पहुंच कर उपायुक्त कार्यालय का घेराव किया और नारेबाज़ी भी की।
नारेबाजी कर रहे कर्मचारियों में सबसे ज्यादा उदासीनता मलेरिया विभाग के cfw ( CONTRACTUAL FIELD WORKER ) कर्मचारियों में देखने को मिली cfw के कर्मचारियों में डर है की इनका वेतन तो समय से मिल ही नहीं रहा है पर कहीं इनकी अब नौकरी भी इनके हाथ से ना छीन जाए। लेकिन ऐसा क्यों है इसकी वजह यह कर्मचारी खुल कर बता नहीं पाए। लेकिन नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना उनके मन में साफ दिख रही थी ।
बता दें की यह कर्मचारी ना केवल अपने वेतन के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं बल्कि इनकी लड़ाई अपने अस्तित्व के लिए भी है।
वहीं अन्य विभाग के कर्मचारियों ने कहा की हम सिर्फ वेतन नहीं बल्कि नियमित वेतन चाहते हैं। क्योंकि लगभग हर साल हमें इसी तरह अपने वेतन के लिये धरना प्रदर्शन करना पड़ता है। जो हमारे हौंसले को तोड़ कर रख देता है। ऐसे में हमें कोई उम्मीद की किरण और सहारा भी नज़र नहीं आ रहा है। जो हमारे दुख और तकलीफ को कम कर सके।