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गहलोत मंत्रिमंडल का विस्तार, 2023 में कैसे होगी नैया पार

जयपुर। लंबी उठापटक के बाद राजस्थान में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद सोमवार दोपहर मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट की मंशा पूरी हो गई है। हटाए गए उनके मंत्रियों को फिर से विभाग मिल गए हैं। पायलट अब खुश नजर आ रहे हैं। हालांकि अभी उनकी खुद की भूमिका तय नहीं की गई।

कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में बगावती नेताओं को मंत्री पद देकर एकजुट करने में तो सफल हो गया लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल आगामी 2023 के विधानसभा चुनाव है। इस चुनावी नैया को यह कुनबा कैसे पार करेगा। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी असंतोष की सुगबुगाहट आ रही है। गहलोत असंतुष्टों को कमेटियों, बोर्डों में पदों का लॉलीपॉप देने का वादा कर रहे हैं।
विभाग बंटवारे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले की तरह ही अपने पास 10 विभाग रखे हैं। इनमें वित्त, टैक्सेशन, गृह और न्याय, कार्मिक, आईटी, सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय, एनआरआई, राजस्थान स्टेट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो और सूचना जनसंपर्क विभाग शामिल हैं। गहलोत के पास पहले 11 विभाग थे। इसमें से आबकारी विभाग छोड़ दिया है, जबकि सूचना जनसंपर्क विभाग ले लिया है।

गोविंद सिंह डोटासरा के पास रहा शिक्षा विभाग बीडी कल्ला को दिया गया है। रघु शर्मा के पास रहा स्वास्थ्य विभाग, परसादीलाल मीणा को दिया है। शांति धारीवाल के पास यूडीएच, ससंदीय कार्य, लीगल सहित सभी विभाग पहले की तरह बरकरार रखे गए हैं।
शांति धारीवाल के पास यूडीएच, ससंदीय कार्य, लालचंद कटारिया के पास कृषि, प्रमोद जैन भाया के पास खान गोपालन, उदयलाल आंजना के पास सहकारिता, शाले मोहम्मद के पास अल्पसंख्यक कल्याण विभाग बरकरार रखा है। राज्य मंत्री से प्रमोट होकर कैबिनेट मंत्री बनीं ममता भूपेश के पास महिला बाल विकास विभाग पहले के ही तरह हैं। राज्य मंत्री अशोक चांदना के पास खेल, युवा मामले पूर्ववत हैं। सूचना जनसंपर्क विभाग नया जोड़ा है। सुभाष गर्ग के पास तकनीकी शिक्षा, आयुर्वेद बरकरार रखकर दो विभाग नए जोड़े हैं।

तीन पुराने कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्री से कैबिनेट प्रमोट हुए दो मंत्रियों को मिलाकर 5 कैबिनेट मंत्रियों के विभाग बदले हैं। बीडी कल्ला से ऊर्जा, पीएचईडी लेकर उसकी जगह शिक्षा, प्रतापसिंह खाचरियावास को परिवहन की जगह खाद्य विभाग, परसादीलाल मीणा को उद्योग की जगह स्वास्थ्य विभाग दिया है। राज्य मंत्री से प्रमोट होकर कैबिनेट मंत्री बने टीकाराम जुली को श्रम विभाग की जगह सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग और भजनलाल जाटव को होम गार्ड की जगह पीडब्ल्यूडी जैसा बड़ा विभाग दिया है।

राज्य मंत्रियों में भंवर सिंह भाटी, राजेंद यादव, सुखराम बिश्नोई के विभाग बदले गए हैंं। भाटी को उच्च शिक्षा की जगह ऊर्जा, जल संसाधन और इंदिरा गांधी नहर परियोजना दिया है। सुखराम बिश्नोई को वन विभाग की जगह श्रम और राजस्व विभाग दिया है। सामाजिक न्याय विभाग दलित वर्ग से आने वाले मंत्री टीकाराम जुली को दिया है। यह विभाग पहले दिवंगत मास्टर भंवरलाल के पास था।

भंवर सिह भाटी को ऊर्जा विभाग का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। बीडी कल्ला से ऊर्जा विभाग लेकर राज्य मंत्री भंवर सिंह भाटी को दिया है। भाटी को इंडिपेंडेंट चार्ज दिया गया है। बिजली जैसा जनता से जुड़ा विभाग देकर उनका कद बढ़ाया है। यह भी संयोग है कि कल्ला और भाटी दोनों एक ही जिले बीकानेर के हैं। विश्वेंद्र सिंह जिस विभाग से बर्खास्त हुए थे, वही पर्यटन विभाग उन्हें वापस मिल गया है।

पिछले साल सचिन पायलट कैंप की बगावत के बाद मंत्री पद से बर्खास्त हुए विश्वेंद्र सिंह को वापस वही विभाग दिया गया है। विश्वेंद्र सिंह को पर्यटन विभाग और सिविल एविएशन विभाग दिया है। पहले भी उनके पास पर्यटन विभाग ही था।

राजस्थान में कांग्रेस का यह कुनबा बचे हुए चुनावी समय में कौनसा तीर मारेगा, यह तो भविष्य बताएगा लेकिन हर पांच साल में सत्ता बदलने वाले राजस्थान में इस बार भाजपा सत्ता का छींका टूटने के इंतजार में जरूर मुंह खोले नजर आ रही है। यह बात और है कि प्रदेश भाजपा भी दो गुटों में बंटी हुई है। सतीश पुनिया और वसुंधरा राजे सिंधिया और उनके समर्थक अपनी डपली, अपना राग अलाप रहे हैं।

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