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बिना चले ही दिल्ली वालों की जेब से कट रहे ₹1,200 करोड़! जानिए बवाना पावर प्लांट का पूरा सच

राजधानी दिल्ली में बिजली बिलों को लेकर आम जनता लगातार परेशान है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आपके बिजली बिल में आ रही तेजी का एक बड़ा कारण दिल्ली का ही एक विशाल पावर प्लांट है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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20 अगस्त 2026 · 1:51 am1.8 हज़ार व्यूज़अपडेटेड 3:46 amनई दिल्ली
बिना चले ही दिल्ली वालों की जेब से कट रहे ₹1,200 करोड़! जानिए बवाना पावर प्लांट का पूरा सच
बिना चले ही दिल्ली वालों की जेब से कट रहे ₹1,200 करोड़! जानिए बवाना पावर प्लांट का पूरा सच

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बिजली बिलों को लेकर आम जनता लगातार परेशान है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आपके बिजली बिल में आ रही तेजी का एक बड़ा कारण दिल्ली का ही एक विशाल पावर प्लांट है। उत्तर-पश्चिम दिल्ली में स्थित 1,371.2 मेगावाट क्षमता का बवाना कंबाइंड साइकिल गैस टरबाइन (CCGT) पावर स्टेशन अपनी पूरी क्षमता से चल भी नहीं पा रहा है, फिर भी दिल्ली की जनता को हर साल इसके रखरखाव और फिक्स्ड कॉस्ट के नाम पर करीब ₹1,200 करोड़ चुकाने पड़ रहे हैं।

क्षमता पूरी, लेकिन उत्पादन सिर्फ 22 से 29 प्रतिशत

दिल्ली SLDC और CERC की रिपोर्ट के अनुसार, बवाना पावर प्लांट तकनीकी रूप से पूरी तरह दुरुस्त है और इसकी उपलब्धता (Availability) 90% के आसपास बनी रहती है। लेकिन इसके बावजूद इसका वास्तविक प्लांट लोड फैक्टर (PLF) 2020-21 के बाद से लगातार 22% से 29% के निचले स्तर पर अटका हुआ है। यानी 1,371.2 मेगावाट क्षमता वाला यह प्लांट ज्यादातर समय अपनी कुल क्षमता के एक-तिहाई से भी कम पर काम करता है।

क्यों नहीं बन पा रही पूरी बिजली?

बवाना पावर प्लांट की इस बदहाली के पीछे सबसे मुख्य कारण ईंधन यानी प्राकृतिक गैस की कमी और उसकी भारी-भरकम कीमत है:

सीमित सस्ती गैस: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्लांट को 1.564 MMSCMD सस्ती APM (एडीमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म) गैस मिलती है, जिससे केवल 320 मेगावाट तक ही बिजली बनाई जा सकती है।

महंगी RLNG गैस पर निर्भरता: 320 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन के लिए प्लांट को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगी RLNG या Spot-RLNG गैस खरीदनी पड़ती है।

दोगुनी हुई ईंधन की कीमत: प्राथमिक ईंधन की landed कीमत ₹15.42 प्रति SCM से बढ़कर ₹29 से ₹34 प्रति SCM तक पहुंच चुकी है।

बिजली की दर ₹11 के पार, उपभोक्ता पर सीधा असर

ईंधन महंगा होने के कारण बवाना प्लांट से पैदा होने वाली बिजली की प्रति यूनिट लागत ₹6.37–8.64 से बढ़कर सीधे ₹10.87 से ₹11.96 प्रति यूनिट तक पहुंच गई है।

बिजली कंपनियां इतने महंगे दामों पर बिजली खरीदने से बचती हैं, यही वजह है कि प्लांट को मेरिट ऑर्डर के तहत कम चलाया जाता है। लेकिन नियमों के मुताबिक, बिजली बने या न बने, दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को हर साल लगभग ₹1,200 करोड़ की 'सालाना फिक्स्ड कॉस्ट' (AFC) प्लांट को देनी ही पड़ती है। यह भारी-भरकम फिक्स्ड कॉस्ट पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) के जरिए अंततः दिल्ली के आम उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में जुड़कर उनकी जेब ढीली करती है।

पर्यावरणीय समस्या भी बनी चुनौती

प्लांट के ठीक बगल में स्थित कचरा भराव क्षेत्र (Landfill Site) और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से निकलने वाले धुएं और कणों के कारण सर्दियों के मौसम में प्लांट में बार-बार ट्रिपिंग की समस्या भी देखने को मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक केंद्र सरकार द्वारा बवाना प्लांट को अतिरिक्त सस्ती घरेलू गैस का आवंटन नहीं किया जाता या लॉन्ग-टर्म गैस समझौतों का कोई स्थायी रास्ता नहीं निकलता, तब तक यह 4,400 करोड़ से अधिक की लागत वाला प्लांट दिल्ली वालों की जेब पर इसी तरह भारी पड़ता रहेगा।

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