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कनाडा में भारतीय छात्रों के आवेदनों में भारी गिरावट, जीवनसाथी के वर्क परमिट पर रोक को बताया गया मुख्य कारण

कनाडाई उच्चायोग के आंतरिक पत्राचार के अनुसार, स्पाउस वीजा नियमों में सख्ती के बाद भारतीय आवेदकों ने जर्मनी और स्वीडन जैसे अन्य देशों का रुख किया है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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21 जुलाई 2026 · 5:42 am3 हज़ार व्यूज़
कनाडा में भारतीय छात्रों के आवेदनों में भारी गिरावट, जीवनसाथी के वर्क परमिट पर रोक को बताया गया मुख्य कारण
कनाडा में भारतीय छात्रों के आवेदनों में भारी गिरावट, जीवनसाथी के वर्क परमिट पर रोक को बताया गया मुख्य कारण — Hindustan Times

कनाडा के आप्रवासन अधिकारियों का मानना है कि भारत से पढ़ाई के लिए आने वाले आवेदनों में कमी की एक बड़ी वजह जीवनसाथी (स्पाउस) के ओपन वर्क परमिट पर लगाए गए प्रतिबंध हैं। इन प्रतिबंधों से पहले, कनाडा जाने के लिए आपसी समझौते के तहत होने वाली शादियों (मैरिज ऑफ कन्वीनियंस) का सहारा लिया जाता था, जिसमें अब भारी कमी आई है।

नई दिल्ली में कनाडाई उच्चायोग में प्रथम सचिव (प्रवासन) हान डुआन और अनियमित प्रवासन व जोखिम खुफिया विभाग के निदेशक शॉन मैकलुकी के बीच हुए पत्राचार में यह बात सामने आई है। वैंकूवर के आव्रजन वकील रिचर्ड कुरलैंड द्वारा जारी किए जाने वाले न्यूजलेटर 'लेक्सबेस' के माध्यम से यह आंतरिक संचार सार्वजनिक हुआ है।

22 मार्च 2025 के इस पत्राचार में हान डुआन ने कहा कि कनाडा में पढ़ाई और रहने के ऊंचे खर्च के कारण कई भारतीय आवेदक वित्तीय सहायता के बदले जीवनसाथी को ओपन वर्क परमिट दिलाने के लिए समझौते की शादियों पर निर्भर थे। डुआन के अनुसार, इस तरह की प्रथाओं का स्थानीय समाचार पत्रों और डेटिंग ऐप्स पर व्यापक रूप से विज्ञापन दिया जाता था।

अधिकारी के मुताबिक, साल 2024 में जीवनसाथी के ओपन वर्क परमिट पर प्रतिबंध लागू होने के बाद कई भारतीय आवेदकों ने उन देशों का रुख कर लिया है जो अब भी स्पाउस वीजा की अनुमति देते हैं। इस बदलाव के कारण जर्मनी, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देशों में भारतीय आवेदकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

इसी तरह का रुझान आयरलैंड, फ्रांस और इटली में भी देखा गया है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने भी अपने यहाँ जीवनसाथी के वीजा पर इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं, जिसके बाद वहां भी भारतीय आवेदकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।

कनाडाई अधिकारी ने कहा कि हालिया नीतिगत बदलावों ने उन आवेदकों की रणनीतियों को प्रभावित किया है जो स्कूल बदलना चाहते थे या पढ़ाई के बजाय काम को प्राथमिकता देना चाहते थे। इसके अलावा, मजबूत शैक्षणिक और भाषा योग्यता रखने वाले छात्र अब उन देशों को चुन रहे हैं जो जीवनसाथी को वीजा देते हैं, जिससे कनाडा के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की गुणवत्ता में भी गिरावट आई है।

पत्राचार में यह भी उल्लेख किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लेकर कनाडा में बदलते जनमत ने भी छात्रों के फैसलों को प्रभावित किया है। पिछले साल छात्र संख्या की सीमा तय किए जाने और कई नीतिगत उपायों के बाद से, नई दिल्ली स्थित कनाडाई उच्चायोग ने न केवल आवेदनों की संख्या में बल्कि आवेदकों की गुणवत्ता में भी गिरावट दर्ज की है।

इनसे संबंधितCanada Student VisaSpousal Work PermitIndian StudentsImmigration Policy
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