दिल्ली की सीमाओं पर बैरियर-मुक्त टोल प्रणाली में देरी, सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका
सर्दियों के प्रदूषण से पहले दिल्ली के प्रमुख बॉर्डर पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल व्यवस्था शुरू करने की योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है।

राजधानी दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण का मौसम नजदीक आने के बावजूद सीमाओं पर वाणिज्यिक वाहनों के लिए बैरियर-मुक्त टोल प्रणाली शुरू करने का जमीनी काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत तैयार की गई इस योजना में हो रही देरी से चिंताएं बढ़ गई हैं। टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम के कारण सबसे प्रदूषित महीनों में वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन और अधिक बढ़ सकता है।
मल्टी-लेन फ्री फ्लो यानी एमएलएफएफ तकनीक के जरिए वाहनों को बिना रुके टोल प्लाजा पार करने की सुविधा मिलनी है। इस प्रणाली में ओवरहेड गैन्ट्री, आरएफआईडी रीडर, सेंसर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाए जाने हैं। दिल्ली नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार नौ प्रमुख बॉर्डर प्वाइंट्स का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की अनुमति मिलने के बाद ही जमीनी काम शुरू हो सकेगा।
अधिकारियों का मानना है कि पहले चरण को अगले महीने तक पूरा करने का लक्ष्य हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। कैमरों की खरीद, गैन्ट्री की स्थापना, हाई-स्पीड नेटवर्किंग, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और ट्रायल रन जैसे कई अहम चरण अभी बाकी हैं। व्यस्त राजमार्गों पर निरंतर ट्रैफिक के बीच उपकरणों को लगाने में कम से कम तीन से चार महीने का समय लग सकता है, जबकि अक्टूबर से ही दिल्ली की वायु गुणवत्ता बिगड़ने लगती है।
शुरुआती चरण के लिए चिन्हित किए गए नौ टोल प्लाजा में टिकरी, सिंघु, कापसहेड़ा, आया नगर, बदरपुर, अप्सरा-शाहदरा, न्यू मंडोली, गाजीपुर और रजोकरी शामिल हैं। इनमें से गाजीपुर टोल प्लाजा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के जरिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से आने वाले भारी ट्रैफिक को संभालता है। निगम अधिकारियों के मुताबिक संबंधित एजेंसी को प्रणाली स्थापित करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है, लेकिन सर्दियों से पहले प्रमुख बिंदुओं को कवर करने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 17 दिसंबर को दिल्ली की सीमाओं पर लगने वाले भारी जाम और प्रदूषण को देखते हुए एमसीडी को नौ टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या हटाने पर विचार करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि वित्तीय लाभ जनहित से बड़ा नहीं हो सकता। इसके बाद नगर निगम ने अदालतों और संबंधित एजेंसियों को भरोसा दिया था कि नए अनुबंध के तहत अक्टूबर तक प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर-मुक्त टोल व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
एमसीडी के नए टोल संग्रह अनुबंध के तहत एजेंसी 154 टोल प्लाजा से टैक्स जुटाएगी और एमएलएफएफ तकनीक पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस नए अनुबंध से निगम को सालाना लगभग 964 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी ने निविदा शर्तों में हेरफेर के आरोप लगाए थे, जबकि एमसीडी का कहना है कि सभी नियमों का पालन किया गया और अदालत ने इस संबंध में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
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