सामग्री पर जाएँ
ताज़ा
संस्कारों और सम्मान से संवरती सुरक्षा: आउटर नॉर्थ पुलिस ने बुजुर्गों का बढ़ाया मानग्रेटर कैलाश 2: पूर्व साथी पर घर में घुसकर युवती से मारपीट, छेड़छाड़ और धमकी का आरोपनई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास पुलिस और बदमाशों में मुठभेड़, विकास कालिया गैंग के 2 इनामी शूटर गोली लगने से ढेर/घायलनिजामुद्दीन गोलीबारी मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी मोहम्मद शाहरुख की अग्रिम जमानत याचिका की खारिजसोनीपत में ट्रैक्टर लोन की किस्त हड़पने वाला फाइनेंस कंपनी कर्मी गिरफ्तार, किसान से लिए थे 85 हजार रुपयेआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सिर्फ कंपनियों का नियंत्रण काफी नहीं, बने कड़ा सरकारी कानून: बिल गेट्स

दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

अदालत ने दोनों सरकारों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया, मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
शेयर
11 सितंबर 2026 · 12:51 pm1.5 हज़ार व्यूज़
दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब — Hindustan Times

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार से उनका रुख स्पष्ट करने को कहा है। न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने दोनों सरकारों को नोटिस जारी करते हुए अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

यह याचिका मोहम्मद शाहिद द्वारा दायर की गई है, जिसमें वक्फ अधिनियम 1995 (संशोधित वक्फ अधिनियम 2025) के तहत बोर्ड के गठन की वैधानिक प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी कि पिछले दिल्ली वक्फ बोर्ड का कार्यकाल अगस्त 2023 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन उसके बाद से नए बोर्ड के गठन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

याचिका में बताया गया कि दिल्ली सरकार ने जनवरी 2024 में एक प्रशासक की नियुक्ति तो की थी, लेकिन कानूनी अनिवार्यता के बावजूद बोर्ड का औपचारिक गठन अब तक नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि 2025 के संशोधन के बाद भी संसद ने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में वक्फ बोर्ड गठित करने के वैधानिक दायित्व को बरकरार रखा है। ऐसे में बोर्ड का गठन न करना अधिकारियों की ओर से वैधानिक दायित्व का सीधा उल्लंघन है।

याचिका में यह चिंता भी जताई गई कि लंबे समय से बोर्ड का अस्तित्व न होने के कारण दिल्ली में स्थित वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण, अनधिकृत कब्जे और उनके दुरुपयोग का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उचित निगरानी तंत्र के अभाव में सार्वजनिक धर्मार्थ संस्थान, मस्जिदें, कब्रिस्तान और शैक्षणिक संस्थान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे इस समुदाय से जुड़े लोगों को वैधानिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।

अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि कार्यपालिका की लगातार निष्क्रियता किसी संसदीय कानून को निष्प्रभावी नहीं बना सकती। याचिका के अनुसार, जब संसद ने बोर्ड के गठन का प्रावधान किया है तो संबंधित सरकारें एक उचित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाध्य हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रिजवान अहमद, फिरोज खान गाजी, मोहम्मद वासिक खान, हिमांशु गुप्ता और मोहम्मद शोएब अंसारी पेश हुए।

इनसे संबंधितdelhi-ncrDelhi High CourtDelhi Waqf BoardWaqf ActDelhi News
शेयर

लेखक

टिप्पणियाँ

0

चर्चा में शामिल होने के लिए साइन इन करें। टिप्पणियाँ शिष्टता के लिए संचालित होती हैं।

आगे पढ़ें

संबंधित कवरेज

कालकाजी कांड के बाद आधी रात सड़कों पर उतरीं महिलाएं, एकजुटता मार्च निकाल जताया विरोध2.5 हज़ार

कालकाजी कांड के बाद आधी रात सड़कों पर उतरीं महिलाएं, एकजुटता मार्च निकाल जताया विरोध

आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में कालकाजी की सड़कों पर करीब 60 महिलाओं ने देर रात पैदल मार्च निकाला।

गजरौला में बस से बिछड़ी किशोरी को पुलिस ने दिल्ली में सकुशल तलाशा, परिजनों को सौंपा1.8 हज़ार

गजरौला में बस से बिछड़ी किशोरी को पुलिस ने दिल्ली में सकुशल तलाशा, परिजनों को सौंपा

अमरोहा के गजरौला में बस से उतरते समय मां से अलग हुई किशोरी को पुलिस ने सात घंटे के भीतर दिल्ली से खोज निकाला।