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दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

अदालत ने दोनों सरकारों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया, मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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11 सितंबर 2026 · 12:51 pm67 व्यूज़
दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाबHindustan Times

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार से उनका रुख स्पष्ट करने को कहा है। न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने दोनों सरकारों को नोटिस जारी करते हुए अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

यह याचिका मोहम्मद शाहिद द्वारा दायर की गई है, जिसमें वक्फ अधिनियम 1995 (संशोधित वक्फ अधिनियम 2025) के तहत बोर्ड के गठन की वैधानिक प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी कि पिछले दिल्ली वक्फ बोर्ड का कार्यकाल अगस्त 2023 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन उसके बाद से नए बोर्ड के गठन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

याचिका में बताया गया कि दिल्ली सरकार ने जनवरी 2024 में एक प्रशासक की नियुक्ति तो की थी, लेकिन कानूनी अनिवार्यता के बावजूद बोर्ड का औपचारिक गठन अब तक नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि 2025 के संशोधन के बाद भी संसद ने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में वक्फ बोर्ड गठित करने के वैधानिक दायित्व को बरकरार रखा है। ऐसे में बोर्ड का गठन न करना अधिकारियों की ओर से वैधानिक दायित्व का सीधा उल्लंघन है।

याचिका में यह चिंता भी जताई गई कि लंबे समय से बोर्ड का अस्तित्व न होने के कारण दिल्ली में स्थित वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण, अनधिकृत कब्जे और उनके दुरुपयोग का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उचित निगरानी तंत्र के अभाव में सार्वजनिक धर्मार्थ संस्थान, मस्जिदें, कब्रिस्तान और शैक्षणिक संस्थान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे इस समुदाय से जुड़े लोगों को वैधानिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।

अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि कार्यपालिका की लगातार निष्क्रियता किसी संसदीय कानून को निष्प्रभावी नहीं बना सकती। याचिका के अनुसार, जब संसद ने बोर्ड के गठन का प्रावधान किया है तो संबंधित सरकारें एक उचित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाध्य हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रिजवान अहमद, फिरोज खान गाजी, मोहम्मद वासिक खान, हिमांशु गुप्ता और मोहम्मद शोएब अंसारी पेश हुए।

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