रोशनी का उत्सव, बारह तस्वीरों में
वाराणसी के घाटों से केरल के बैकवाटर तक, वह रात जब देश जगमगाता है।
यह कहानी किसी सुर्खी के साथ नहीं आई। जैसा अहम कहानियों के साथ अक्सर होता है, यह ब्योरों में आई — और उन्हें समझने में लगे दिनों में।
वाराणसी के घाटों से केरल के बैकवाटर तक, वह रात जब देश जगमगाता है।
ज़मीन पर
आँकड़े एक कहानी कहते हैं; उनके भीतर के लोग दूसरी। दोनों सच हैं, और एक-दूसरे के बिना कोई भी पूरी नहीं।
इस विवरण का हर आँकड़ा एक ऐसे व्यक्ति का है जिसने आँकड़ा बनना नहीं चुना।
संपर्क करने पर अधिकारियों ने प्रक्रिया और समीक्षा की जानी-पहचानी भाषा दी। ज़मीन पर, समय-सीमा कहीं कम धैर्यवान महसूस हुई।
बड़ी तस्वीर
रिपोर्टिंग जारी रहेगी। और इसके केंद्र में मौजूद लोगों के लिए, इंतज़ार भी।
लेखक

टिप्पणियाँ
3आगे क्या होगा वाला हिस्सा वही है जिसे सब छोड़ेंगे और सबको पढ़ना चाहिए।
आख़िरकार, ऐसी कवरेज जो पाठक की समझ का सम्मान करती है। धन्यवाद।
क्षेत्रीय असर पर थोड़ा और होता तो अच्छा था, पर कुल मिलाकर मज़बूत लेख।