नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन, कई हिरासत में
मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने के विरोध में राजधानी के मध्य क्षेत्र में हजारों लोगों ने किया प्रदर्शन।

देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक केंद्र कनॉट प्लेस में शुक्रवार को हजारों लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। युवा संगठन 'कॉकरोच' आंदोलन के आह्वान पर आयोजित इस रैली में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रमुख छात्र नेता नेहा बोरा समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया के विरोध में आयोजित किया गया था, जिसके तहत पिछले साल से अब तक 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं। आलोचकों और विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम राजनीति से प्रेरित है और इसके चलते लाखों नागरिकों, विशेषकर अल्पसंख्यकों और मुसलमानों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। इसी के चलते प्रदर्शनकारी चुनाव प्रमुख के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा केवल दोहरे और अयोग्य नामों को हटाने के उद्देश्य से की जा रही है। प्रधानमंत्री ने इस पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, हालांकि उनकी पार्टी के कुछ नेताओं ने प्रदर्शनकारियों को अराजकतावादी बताते हुए बिना साक्ष्य के उनके विदेशी ताकतों से जुड़े होने का दावा किया है।
प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस ने आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया था। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में पुलिस उन्हें घर से निकलते ही रोककर गाड़ी में ले जाती दिखी। इससे पहले दीपके ने उन समर्थकों से अपने-अपने इलाकों में तिरंगा फहराकर प्रदर्शन करने की अपील की थी जो दिल्ली नहीं पहुंच सकते थे।
कनॉट प्लेस में शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों की संख्या सुरक्षाकर्मियों के मुकाबले कहीं अधिक थी, जबकि दंगा रोधी पुलिस की टुकड़ियां भी तैनात थीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने शुक्रवार और शनिवार को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को बंद कर दिया था। इससे पहले पुलिस ने आम लोगों से इस विरोध मार्च में शामिल न होने का आग्रह किया था।
उल्लेखनीय है कि 'कॉकरोच' आंदोलन की शुरुआत इस साल गर्मियों में भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई एक टिप्पणी के बाद व्यंग्यात्मक अभियान के तौर पर हुई थी। युवाओं ने इसे अपनी सहनशीलता का प्रतीक बना लिया और यह धीरे-धीरे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया। इस समूह के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद जुलाई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भी इस्तीफा देना पड़ा था।
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