फीफा विश्व कप 2026: स्पेन की जीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप पर उठे सवाल
फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर खिताब अपने नाम किया, लेकिन इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक हस्तक्षेप और नीतियों की काफी चर्चा रही।

स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले के बाद जब स्पेन के कप्तान रोड्री ट्रॉफी हाथ में थामे हुए थे, तब मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा। ट्रंप को मंच से आगे बढ़ाने के लिए फीफा अध्यक्ष गियानी इन्फेंटिनो को बीच में आना पड़ा, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फाइनल मुकाबले को देखने के लिए स्टेडियम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जो इस टूर्नामेंट का पहला मैच था जिसमें वे व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए। हालांकि, ट्रंप ने इस आयोजन को दुनिया के इतिहास का सबसे सफल खेल आयोजन करार दिया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने घरेलू राजनीतिक लाभ के लिए इस पूरे टूर्नामेंट का इस्तेमाल किया।
पैसिफिक यूनिवर्सिटी के राजनीति विभाग के प्रोफेसर जूल्स बॉयकॉफ़ के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने आगामी मध्यावधि चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस टूर्नामेंट का राजनीतिकरण किया। उनके प्रशासन की नीतियों के कारण सोमालिया के एक फीफा रेफरी को अमेरिका में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके अलावा, ईरानी टीम को मैक्सिको में प्रशिक्षण लेने और मैचों के लिए लॉस एंजिल्स और सिएटल की यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ा।
टूर्नामेंट के दौरान ट्रंप द्वारा फीफा को किए गए एक फोन कॉल को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड निलंबन को रद्द करने के लिए फीफा पर दबाव बनाया था, जिसमें वे सफल भी रहे। हालांकि, अमेरिकी टीम अंतिम-16 के मुकाबले में बेल्जियम से 4-1 से हारकर बाहर हो गई।
खिलाड़ी बालोगुन ने खुद स्वीकार किया कि इस हस्तक्षेप के कारण टीम के भीतर विवाद और घबराहट का माहौल बन गया था। वहीं खोजी पत्रकार करीम जीदान का कहना है कि ट्रंप का यह कदम उनके लिए एक राजनीतिक भूल साबित हुआ। उनके अनुसार, अमेरिकी टीम जो देश को एकजुट कर सकती थी, उस पर इस हस्तक्षेप ने एक दाग लगा दिया।
वर्तमान में ट्रंप की लोकप्रियता दर 40 प्रतिशत से नीचे है और अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ईरान में जारी युद्ध के बीच ट्रंप की नीतियों और खेल में उनके हस्तक्षेप की वैश्विक स्तर पर आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि इन कदमों ने फीफा के 'फुटबॉल दुनिया को जोड़ता है' के नारे को कमजोर किया है।
इसके बावजूद, ट्रंप ने भविष्य में फिर से इस टूर्नामेंट की मेजबानी हासिल करने की इच्छा जताई है। उन्होंने फीफा अध्यक्ष को सुझाव दिया कि अगले आयोजन के लिए दो देशों की घोषणा की जानी चाहिए। गौरतलब है कि अमेरिका साल 2028 में लॉस एंजिल्स ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और 2034 में साल्ट लेक सिटी शीतकालीन ओलंपिक की मेजबानी करने जा रहा है।
लेखक


टिप्पणियाँ
2आगे क्या होगा वाला हिस्सा वही है जिसे सब छोड़ेंगे और सबको पढ़ना चाहिए।
आख़िरकार, ऐसी कवरेज जो पाठक की समझ का सम्मान करती है। धन्यवाद।