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न्यू जर्सी से नॉर्थ कैरोलिना तक गूंजा 'सतनाम': अमेरिका में संत सुरेश भैया जी ने फहराया सनातन ध्यान-योग का परचम

अखिल भारतीय संतमत सत्संग, दिल्ली के तत्वावधान में संत सुरेश भैया जी ने अमेरिका में ‘आनंद योग मेडिटेशन एंड कंसंट्रेशन यूएसए प्रोग्राम 2026’ के माध्यम से भारतीय अध्यात्म, ध्यान, सत्संग और सतनाम का संदेश दिया। न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, अलबामा, जॉर्जिया और नॉर्थ कैरोलिना में आयोजित कार्यक्रमों में सैकड़ों साधकों ने भाग लिया। संत सुरेश भैया जी ने ध्यान को मानसिक शांति, आत्मज्ञान और आंतरिक चेतना से जोड़ते हुए इसे आधुनिक जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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28 जुलाई 2026 · 5:14 am3 हज़ार व्यूज़
न्यू जर्सी से नॉर्थ कैरोलिना तक गूंजा 'सतनाम': अमेरिका में संत सुरेश भैया जी ने फहराया सनातन ध्यान-योग का परचम
न्यू जर्सी से नॉर्थ कैरोलिना तक गूंजा 'सतनाम': अमेरिका में संत सुरेश भैया जी ने फहराया सनातन ध्यान-योग का परचम

नई दिल्ली। भारत सदियों से केवल एक भौगोलिक राष्ट्र नहीं, बल्कि योग, ध्यान, तप, साधना और आत्मज्ञान की सनातन आध्यात्मिक चेतना का संवाहक रहा है। भारत की ऋषि-परंपरा ने सदैव संसार को यह दृष्टि दी है कि मनुष्य की वास्तविक यात्रा बाहरी दुनिया को जीतने से अधिक अपने भीतर के सत्य को जानने की है। इसी सनातन परंपरा का विस्तार करते हुए अखिल भारतीय संतमत सत्संग, दिल्ली के तत्वावधान में संत सुरेश भैया जी ने अमेरिका की धरती पर आनंद योग, ध्यान, सत्संग और सतनाम के माध्यम से भारतीय अध्यात्म का प्रकाश फैलाया। जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक आयोजित 'आनंद योग मेडिटेशन एंड कंसंट्रेशन यूएसए प्रोग्राम 2026' के अंतर्गत न्यू जर्सी से लेकर नॉर्थ कैरोलिना तक सैकड़ों साधकों ने सत्संग और ध्यान साधना से जुड़कर आत्मज्ञान प्राप्त किया।

संत सुरेश भैया जी ने अमेरिका में भारत की प्राचीन ध्यान-योग विद्या को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के अनुसार सहज और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने संदेश दिया कि आधुनिक मनुष्य ने भौतिक संसार में अभूतपूर्व प्रगति की है, किंतु मन की शांति और आत्मिक स्थिरता की खोज आज भी जारी है। इसका समाधान बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि मनुष्य के अपने अंतर्मन में छिपा है। इस प्रकार यह यात्रा केवल एक भौगोलिक यात्रा न रहकर पूर्व की प्राचीन आध्यात्मिक चेतना और पश्चिम के आधुनिक जीवन के बीच एक मजबूत आत्मिक सेतु के रूप में सामने आई।

संतमत की परंपरा में सत्संग केवल विचारों को सुनने का माध्यम नहीं, बल्कि सत्य का संग करने का मार्ग है। संत सुरेश भैया जी ने अपने सत्संगों में साधकों को सतनाम की महिमा, सतगुरु की आवश्यकता और ध्यान के माध्यम से अंतर्मुखी होने का महत्व समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब साधक सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को सत्य की ओर मोड़ता है, सतनाम के स्मरण से मन को स्थिर करता है और सतगुरु के मार्गदर्शन में भीतर उतरता है, तभी वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ होती है। आनंद योग इसी यात्रा को सहज बनाता है, जहाँ ध्यान केवल आंखें बंद करना नहीं, बल्कि मन के कोलाहल से ऊपर उठकर भीतर की चेतना को अनुभव करने की प्रक्रिया बन जाता है।

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अमेरिका में इस आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ न्यू जर्सी एवं न्यूयॉर्क क्षेत्र के बास्किंग रिज, लॉन्ग आइलैंड और सेंटर इस्लिप से हुआ, जहाँ विभिन्न आवासीय परिसरों, कम्युनिटी सेंटरों तथा मंदिरों में ध्यान और शांति पाठ आयोजित किए गए। इसके पश्चात अलबामा के वेटुम्पका, मोंटगोमरी, बर्मिंघम और जॉर्जिया के अटलांटा में आनंद योग की धारा पहुँची। यहाँ साधकों को समझाया गया कि शांति बाहर से प्राप्त करने की चीज़ नहीं, बल्कि भीतर मौजूद वह अवस्था है जिसे साधना से जागृत किया जाता है। भारतीय मूल के श्रद्धालुओं के साथ-साथ विभिन्न पृष्ठभूमियों के योग-जिज्ञासुओं की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि अध्यात्म की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।

नॉर्थ कैरोलिना के रैले शहर में इस आयोजन को विशेष प्रतिसाद मिला। HSNC Temple और Sai Temple सहित विभिन्न सामाजिक मंचों पर संत सुरेश भैया जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया तथा भारतीय संतमत की उस दृष्टि को साझा किया, जो मानव जीवन को आत्मा और परमात्मा के मिलन का अमूल्य अवसर मानती है। यहाँ मंदिरों के साथ-साथ रेडियो संवाद एवं अन्य सार्वजनिक माध्यमों से भी आनंद योग और भारतीय आध्यात्मिक चिंतन का संदेश व्यापक समुदाय तक पहुँचा।

कार्यक्रम के समापन पर संत सुरेश भैया जी ने साधकों को प्रेरित किया कि ध्यान किसी विशेष आयोजन तक सीमित न रहकर जीवन का स्वभाव बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, मनुष्य की मूल प्यास हमेशा शांति, सत्य, प्रेम और आत्मज्ञान की ही रहेगी। इस यात्रा में सत्संग दिशा है, सतनाम साधना है, सतगुरु प्रकाश हैं और आनंद योग परम आनंद तक पहुँचने का सहज पथ है। अंत में, संत श्री सुरेश भैया जी ने अमेरिका में आनंद योग कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अपने सभी शिष्यों, आयोजकों और साधकों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए उन्हें अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

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