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1984 सिख दंगा दोषी सज्जन कुमार के घर पहुंचे बीजेपी के 3 सांसद: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लगाई कड़ी फटकार, पंजाब चुनाव पर असर की आशंका

- 1984 के जख्म और बीजेपी की नैतिकता पर उठे सवाल -दिल्ली देहात का गणित या पार्टी अनुशासन का उल्लंघन?

Rajender Swami
Rajender SwamiDelhi Darpan
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29 अगस्त 2026 · 6:43 am4 हज़ार व्यूज़अपडेटेड 6:46 amनई दिल्ली
1984 सिख दंगा दोषी सज्जन कुमार के घर पहुंचे बीजेपी के 3 सांसद: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लगाई कड़ी फटकार, पंजाब चुनाव पर असर की आशंका
1984 सिख दंगा दोषी सज्जन कुमार के घर पहुंचे बीजेपी के 3 सांसद: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लगाई कड़ी फटकार, पंजाब चुनाव पर असर की आशंका
  • राजेंद्र स्वामी, दिल्ली दर्पण

नई दिल्ली: 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के 20 अगस्त 2026 को हुए निधन के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। सज्जन कुमार के आवास पर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात करने और श्रद्धांजलि व्यक्त करने वाले दिल्ली बीजेपी के तीन प्रमुख सांसदों—रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चंदौलिया और कमलजीत सहरावत—को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तलब कर कड़ी फटकार लगाई है।

पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बीजेपी 1984 सिख दंगा पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और किसी भी नेता का ऐसा कदम पार्टी की नीति व नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तीनों सांसदों को सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में ऐसी किसी गलती की पुनरावृत्ति न हो।

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3 bjp mp— Delhi darpan tv

बीजेपी सांसदों के जाने के पीछे की मुख्य वजह सियासी गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि 1984 दंगों के सजायाफ्ता आरोपी के घर बीजेपी सांसद क्यों पहुंचे? इसके पीछे मुख्य रूप से स्थानीय और सामाजिक समीकरण जिम्मेदार माने जा रहे हैं:

स्थानीय और पारिवारिक संबंध: तीनों सांसद (रामवीर सिंह बिधूड़ी - दक्षिणी दिल्ली, योगेंद्र चंदौलिया - उत्तर-पश्चिम दिल्ली, और कमलजीत सहरावत - पश्चिमी दिल्ली) बाहरी दिल्ली के कद्दावर नेता माने जाते हैं। यह पूरा क्षेत्र अतीत में अविभाजित 'बाहरी दिल्ली' लोकसभा सीट का हिस्सा रहा है, जहां से सज्जन कुमार सांसद रह चुके हैं। दिल्ली देहात और बाहरी दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में सज्जन कुमार और उनके परिवार का लंबा सामाजिक व राजनीतिक प्रभाव रहा है।

जाट और क्षेत्रीय वोट बैंक का प्रभाव: बाहरी दिल्ली के देहाती इलाकों में जाट मतदाता और क्षेत्रीय बिरादरी का व्यापक प्रभाव है। तीनों सांसद इसी सामाजिक ताने-बाने से जुड़े हैं और इसी पृष्ठभूमि के प्रभाव से प्रभावित होकर उन्होंने इसे अपने स्थानीय देहाती संबंधों का हिस्सा माना तथा 'व्यक्तिगत क्षमता' (Personal Capacity) में वहां उपस्थिति दर्ज कराई।

बिना इजाजत उठाया गया कदम: सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से न तो कोई पूर्व अनुमति ली और न ही सलाह-मशविरा किया, जिससे शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष खासा नाराज हो गए।

पंजाब चुनाव और राजनीतिक परिदृश्य पर क्या हो सकता है असर? आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी नेतृत्व सांसदों की इस चूक को काफी गंभीरता से ले रहा है:

सिख समुदाय में भारी नाराजगी और रणनीतिक नुकसान: बीजेपी हमेशा 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे पर कांग्रेस और सज्जन कुमार जैसे नेताओं को घेरती रही है। दंगों के पीड़ितों की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वरिष्ठ वकील एच.एस. फुल्का समेत सिख समाज के प्रतिनिधियों ने इस दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और विरोध जताया है। ऐसे में बीजेपी सांसदों का यह कदम पार्टी के अपने ही स्टैंड को कमजोर करता है।

विपक्षी दलों को मिला बड़ा सियासी हथियार: आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने तुरंत इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाना शुरू कर दिया है। पंजाब में सिख बहुल मतदाताओं के बीच विपक्षी दल इसे भुनाकर बीजेपी की नीयत पर सवाल उठाने की कोशिश करेंगे।

सिख समाज का भरोसा बनाए रखने की चुनौती: बीजेपी लगातार पंजाब में सिख समुदाय के बीच अपनी स्वीकार्यता और पैठ बढ़ाने का प्रयास कर रही है। सांसदों की इस गतिविधि से सिख पीड़ितों और पंजाबी मतदाताओं के बीच गलत संदेश जाने का जोखिम उत्पन्न हो गया था। इसी नुकसान की भरपाई और स्पष्ट संदेश देने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए तीनों सांसदों को तलब किया और फटकार लगाई।

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congress Learder Sajjan kumar— Delhi darpan tv
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