सीबीआई का खौफ बनाम खौफ का धंधा : दिल्ली में एक तरफ कसता शिकंजा, दूसरी तरफ फर्जी 'स्पेशल 26' का खेल
- भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सख्ती से जहां दागी अधिकारियों में हड़कंप है, वहीं शातिर अपराधी इसी खौफ को ढाल बनाकर फर्जी रेड और रंगदारी का नया धंधा चला रहे हैं।

-मुकेश राणा , दिल्ली दर्पण ब्यूरो
दिल्ली में भ्रष्टाचार के गढ़ माने जाने वाले नगर निगम (MCD) और पुलिस तंत्र पर केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI और ACB) की नजर लगातार टेढ़ी है। हाल ही में केशव पुरम जोन में हुई कार्रवाई में सीबीआई ने एमसीडी के जेई दिलखुश मीणा और उसके सहयोगियों को रिश्वतखोरी के मामले में सलाखों के पीछे भेजकर भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है। लेकिन इसी खौफ का एक खतरनाक पहलू भी सामने आ रहा है—जहां एक तरफ ईमानदार कार्रवाई से हड़कंप है, वहीं दूसरी तरफ कुछ शातिर गिरोह इस खौफ को उगाही और लूटपाट का नया हथियार बना रहे हैं। जांच एजेंसियों की सख्ती और उगाही का गिरोह तंत्र : भ्रष्टाचार पर नकेल: केशव पुरम जोन में जेई दिलखुश मीणा की गिरफ्तारी यह साफ संकेत देती है कि एमसीडी में अवैध निर्माण और लाइसेंस के नाम पर वसूली करने वालों की अब खैर नहीं है। सीबीआई और एसीबी लगातार ट्रैप लगाकर भ्रष्ट अधिकारियों और उनके बिचौलियों (कलेक्शन एजेंटों) को दबोच रही है। केशवपुरम जोन में यह जेई कई कई वार्डों से अवैध वसूली कर रहा था। इसके दो सहयोगी जो दबोचे गए है वे पहले एमसीडी ही थे। यहाँ कई कर्मचारी बिल्डिंग विभाग में जमीन है जिन पर सीबीआई में केस ही दर्ज़ नहीं है बल्कि जेल की हवा भी खा चुकें है।
खौफ का बेजा इस्तेमाल: जांच एजेंसियों के इस बढ़ते दबदबे और खौफ का फायदा अब आपराधिक गिरोह उठा रहे हैं। जिन लोगों के मन में किसी न किसी वजह से सीबीआई का डर बैठा हुआ है, उन्हें ये फर्जी गिरोह अपना आसान शिकार बना रहे हैं।

फर्जी रेड और लूट का नया पैटर्न: केवल डरा-धमकाकर उगाही करना ही नहीं, बल्कि खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर घरों में जबरन घुसना और रेड के नाम पर लूटपाट करना एक नया और गंभीर सुरक्षा खतरा बन गया है।
प्रशांत विहार मामला: 'स्पेशल 26' स्टाइल में फर्जी सीबीआई रेड
रोहिणी के प्रशांत विहार इलाके में हाल ही में घटी घटना इस खौफ के गलत इस्तेमाल का सीधा प्रमाण है, जहां पुलिस ने बॉलीवुड फिल्म 'स्पेशल 26' की तर्ज पर वारदात को अंजाम देने वाले 7 आरोपियों (जिनमें 2 महिलाएं भी शामिल हैं) को धर दबोचा।
वारदात का तरीका: 11 अगस्त को प्रशांत विहार में आरोपियों ने सीबीआई यूनिफॉर्म और फर्जी पहचान पत्र दिखाकर एक घर में जबरन घुसने का प्रयास किया।
जागरूकता से टली घटना: घर में मौजूद महिला ने हिम्मत दिखाते हुए आरोपियों की धमकियों के बावजूद दरवाजा नहीं खोला। जब दरवाजा नहीं खुला, तो आरोपियों ने सीबीआई के फर्जी लेटरहेड पर लिखा एक नोट व्हाट्सएप पर भी भेजा।
तकनीकी सुराग और गिरफ्तारी: पीड़ित परिवार द्वारा लिए गए स्क्रीनशॉट, सीसीटीवी फुटेज और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से रोहिणी जिला डीसीपी शशांक जायसवाल के निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से 8 मोबाइल फोन और सीबीआई के लोगो लगी यूनिफॉर्म बरामद हुई है।
यह घटना दर्शाती है कि जहां सीबीआई की लगातार कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों की रातों की नींद हराम है, वहीं आम नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि फर्जी एजेंसियों के नाम पर हो रही इस उगाही और लूट का शिकार होने से बचा जा सके।
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