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दिल्ली जिमखाना क्लब बेदखली मामला: केंद्र ने हाईकोर्ट में याचिकाओं का किया विरोध, बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा कि सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत दीवानी अदालतों को बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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29 जुलाई 2026 · 12:37 am2.3 हज़ार व्यूज़अपडेटेड 12:37 am
दिल्ली जिमखाना क्लब बेदखली मामला: केंद्र ने हाईकोर्ट में याचिकाओं का किया विरोध, बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर
दिल्ली जिमखाना क्लब बेदखली मामला: केंद्र ने हाईकोर्ट में याचिकाओं का किया विरोध, बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर — Hindustan Times

केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के नए नोटिस पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं का दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध किया है। सरकार ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि उच्च न्यायालय के पास इस मामले में सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं है, इसलिए ये याचिकाएं पोषणीय नहीं हैं।

केंद्र सरकार की ओर से खड़े स्टैंडिंग काउंसल आशीष के दीक्षित के माध्यम से दाखिल हलफनामे में सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 का हवाला दिया गया है। सरकार ने कहा कि इस कानून की धारा 15 के तहत संपदा अधिकारी द्वारा बेदखली को लेकर की जाने वाली या प्रस्तावित किसी भी कार्रवाई पर दीवानी अदालतों द्वारा स्थगनादेश देने पर स्पष्ट प्रतिबंध है।

हलफनामे के अनुसार, सार्वजनिक परिसर अधिनियम अपने आप में एक संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया प्रदान करता है। इसमें कारण बताओ नोटिस जारी करने से लेकर, जांच के बाद बेदखली आदेश पारित करने और जिला जज स्तर के न्यायिक अधिकारी के समक्ष अपील करने तक के सभी स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। सरकार का तर्क है कि इस पूर्ण व्यवस्था के कारण ही संपदा अधिकारी के पास बेदखली कार्यवाही से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने का विशेष अधिकार है।

यह हलफनामा क्लब के पुराने सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर उस आवेदन के जवाब में आया है, जिसमें केंद्र सरकार के 29 जून के नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि 29 जून का कारण बताओ नोटिस गलत और अपरिपक्व मान्यताओं पर आधारित है, क्योंकि लीज रद्द करने की वैधता को चुनौती देने वाली उनकी मुख्य याचिका पहले से ही उच्च न्यायालय में लंबित है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 22 मई को मूल पट्टा विलेख के सार्वजनिक उद्देश्य वाले क्लॉज का हवाला देते हुए जिमखाना क्लब को 2, सफदरजंग रोड स्थित अपना परिसर 5 जून तक भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को सौंपने का निर्देश दिया था। सरकार के इस आदेश में कहा गया था कि यह संपत्ति एक अति संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में स्थित है, जिसकी जरूरत रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है।

मंगलवार को 29 जून के नोटिस के खिलाफ दायर आवेदन और 22 मई के आदेश को चुनौती देने वाले मुकदमे की सुनवाई न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। हालांकि, याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी द्वारा केंद्र के हलफनामे पर जवाब देने के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 3 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। वरिष्ठ अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि उन्हें केंद्र का हलफनामा सोमवार देर रात ही प्राप्त हुआ था।

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