दिल्ली पुलिस ने जाली नोट छापने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, चार गिरफ्तार; 10.50 लाख रुपये के नकली नोट बरामद
प्रशांत विहार इलाके में छापेमारी के बाद पुलिस ने गिरोह के सदस्यों को दबोचा, प्रिंटर और सुरक्षा फीचर वाले कोरे कागज भी जब्त किए गए।

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में नकली नोट बनाने और उनकी आपूर्ति करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 10.50 लाख रुपये के अंकित मूल्य वाले संदिग्ध जाली नोट बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए सभी जाली नोट 500 रुपये के हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 30 सितंबर को प्रशांत विहार क्षेत्र में नकली मुद्रा की आपूर्ति और आवाजाही के संबंध में एक गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर पुलिस की एक टीम ने जापानी पार्क के पास छापेमारी की और मौके से पुष्कर राज पूर्बिया उर्फ 'डॉक्टर', गोसाईं राम तथा साहिल खरब को दबोच लिया। इनके पास से संदिग्ध 500 रुपये के नोट और छपाई में प्रयुक्त उपकरण मिलने के बाद संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े चौथे व्यक्ति तक पहुंची। इसके बाद पुलिस टीम ने राजस्थान के चूरू से नरेंद्र कुमार को भी हिरासत में ले लिया। आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरण, प्रिंटिंग मशीनें और नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 500 रुपये के संदिग्ध नकली नोटों के कुल 21 बंडल जब्त किए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 10.50 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा दो रंगीन प्रिंटर, एक पेपर-कटिंग मशीन, दो एचपी लैपटॉप, एक नोट गिनने की मशीन, स्क्रीन-प्रिंटिंग सामग्री, मॉनिटर के साथ डेस्कटॉप कंप्यूटर, एलसीडी मॉनिटर और एक सीपीयू बरामद हुआ है। पुलिस को मौके से रिबन लगे कोरे कागज और उच्च सुरक्षा विशेषताओं वाले खाली सिक्योरिटी पेपर भी मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, जयपुर निवासी पुष्कर राज पूर्बिया प्रॉपर्टी डीलर का काम करता था और वह जाली नोट बनाने तथा उनके वितरण के लिए अन्य आरोपियों के साथ समन्वय कर रहा था। पुलिस ने बताया कि पूर्बिया पहले भी राजस्थान में धोखाधड़ी के एक मामले और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दर्ज चार मामलों में शामिल रहा है।
वहीं, बाड़मेर निवासी गोसाईं राम ऑनलाइन माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए नोट बनाने का तरीका सीख रहा था तथा इसके लिए जरूरी सामग्री जुटा रहा था। गोसाईं राम और सोनीपत निवासी साहिल खरब ने जाली नोट तैयार करने के लिए सोनीपत में किराए पर एक मकान लिया था, जहां से इस खेप को अन्य जगहों पर भेजा जाता था। अपने पारिवारिक दुकान पर काम करने वाला साहिल सामग्री जुटाने और ठिकाना उपलब्ध कराने में मदद कर रहा था।
चौथा आरोपी नरेंद्र कुमार लगातार पूर्बिया और गोसाईं राम के संपर्क में था और नोट बनाने की सामग्री हासिल करने में उनकी सहायता कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नरेंद्र के खिलाफ भी राजस्थान में मारपीट से संबंधित एक पुराना आपराधिक मामला दर्ज है।
लेखक



टिप्पणियाँ
0