दिल्ली: DTC कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों की हड़ताल, बढ़ते खर्च और सुरक्षा को लेकर सरकार से बड़ी मांग
DTC कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों ने वेतन बढ़ाने के साथ बीमा, दुर्घटना सुरक्षा और परिवार के लिए आर्थिक संरक्षण की मांग की है. हड़ताल से दिल्ली में बस सेवाएं प्रभावित हुईं. ड्राइवरों ने सरकार से जल्द समाधान की अपील करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा.

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 15 सितंबर को DTC की कॉन्ट्रैक्ट बसों के ड्राइवरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल की. हड़ताल के दौरान कई स्थानों पर बसों को सड़कों पर रोक दिया गया, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. ड्राइवरों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है और अब उनके सामने आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.
'862 रुपये में घर चलाना मुश्किल'
प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें प्रतिदिन केवल 862 रुपये का भत्ता मिलता है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में परिवार का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है. उनका कहना है कि पिछले करीब तीन वर्षों से उन्हें इसी दर पर भुगतान किया जा रहा है, जबकि इस दौरान महंगाई लगातार बढ़ी है.ऐसे में उनकी आय और खर्च के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है.
वेतन के साथ सुरक्षा की भी उठी मांग
ड्राइवरों ने केवल वेतन बढ़ाने की ही नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई. उनका कहना है कि वे रोजाना भारी ट्रैफिक में हजारों यात्रियों को लेकर बस चलाते हैं. यदि ड्यूटी के दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाता है या उनकी जान चली जाती है, तो उनके परिवार के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था या आर्थिक संरक्षण उपलब्ध नहीं है.
बीमा और परिवार की आर्थिक सुरक्षा की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को उनके लिए उचित बीमा, दुर्घटना सुरक्षा और परिवार के लिए आर्थिक सहायता जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए. उनका मानना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए.
सरकार से जल्द समाधान की अपील
हड़ताल के कारण दिल्ली के कई इलाकों में DTC बस सेवाएं प्रभावित रहीं और यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा. प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने सरकार से जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है.
उनका कहना है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जा सकता है.

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