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मेरठ पुलिस बर्बरता मामला: प्रत्यक्षदर्शी ने किया 40 मिनट तक चीख-पुकार सुनने का दावा, इंस्पेक्टर निलंबित

मेरठ में किसान नेताओं पर कथित पुलिस बर्बरता के मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी के सामने आने और इंस्पेक्टर के निलंबन के बाद जांच तेज हो गई है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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24 अगस्त 2026 · 8:11 am5.8 हज़ार व्यूज़
मेरठ पुलिस बर्बरता मामला: प्रत्यक्षदर्शी ने किया 40 मिनट तक चीख-पुकार सुनने का दावा, इंस्पेक्टर निलंबित
मेरठ पुलिस बर्बरता मामला: प्रत्यक्षदर्शी ने किया 40 मिनट तक चीख-पुकार सुनने का दावा, इंस्पेक्टर निलंबितDainik Bhaskar

मेरठ में किसान नेताओं के साथ कथित पुलिस बर्बरता और थर्ड डिग्री के मामले में एक नया मोड़ आया है। 19 अगस्त को किसान नेता डॉ. दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद फैजल ने सामने आकर कई अहम दावे किए हैं। उधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद एसएसपी ने सिविल लाइन के तत्कालीन इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार गौड़ को निलंबित कर दिया है।

प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद फैजल के अनुसार, 19 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे वे तीनों एक सफेद स्कॉर्पियो कार से एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। पर्ची बनने के बाद दोनों किसान नेताओं को तत्कालीन एसएसपी के कक्ष में भेजा गया, जबकि वह खुद वेटिंग हॉल में बैठ गया था। फैजल ने बताया कि नेताओं के अंदर जाने के करीब पांच से सात मिनट बाद ही वहां तेज आवाजें और चीख-पुकार शुरू हो गई, जो करीब 40 मिनट तक जारी रही।

फैजल ने दावा किया कि दोपहर करीब 12:30 बजे पुलिसकर्मियों ने दोनों किसान नेताओं के चेहरों पर कपड़ा बांधकर उन्हें बाहर निकाला और एक बोलेरो गाड़ी में बैठाकर कहीं ले गए। इसके साथ ही उसने पुलिस के उस दावे को भी सिरे से खारिज किया, जिसमें नेताओं के स्कूटी से गिरकर घायल होने की बात कही गई थी। उसने कहा कि गाड़ी की चाबी पुलिस ने अपने पास रख ली थी, जिसके बाद मोहित जाटव के भाई ने दूसरी चाबी लाकर स्कॉर्पियो को वहां से हटाया था।

यह पूरा विवाद 19 अगस्त को उस समय शुरू हुआ जब एक मुकदमे के सिलसिले में दोनों किसान नेता तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे से मिलने गए थे। आरोप है कि मुलाकात के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें कमरे में ले जाकर पीटा। इसके बाद उन्हें एसओजी कार्यालय और फिर सिविल लाइन थाने ले जाया गया, जहां से देर रात सपा विधायक अतुल प्रधान उन्हें अपने साथ ले गए।

घटना के अगले दिन किसान नेता दिग्विजय भाटी द्वारा वीडियो जारी करने और सपा विधायक के साथ प्रेसवार्ता करने के बाद मामले ने जोर पकड़ लिया। विवाद बढ़ता देख शासन ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे का तबादला कर उन्हें पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। इसके बाद नए एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने जिले की कमान संभाली और एडीजी जोन के निर्देश पर सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह मामले की जांच करने मेरठ पहुंचे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने सिविल लाइन के पूर्व एसएचओ अखिलेश कुमार गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया था, जिसके बाद इंस्पेक्टर को निलंबित भी कर दिया गया। फिलहाल सिविल लाइन थाने की जिम्मेदारी पीआरओ उप निरीक्षक अरुण भाटी को सौंपी गई है और उच्चाधिकारियों की निगरानी में प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है।

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