दिल्ली से केरल एमडीएमए तस्करी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, महिला समेत चार गिरफ्तार
आबकारी विभाग ने महिंद्रा थार में गुप्त केबिन बनाकर दिल्ली से केरल मादक पदार्थ लाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से 279.3 ग्राम एमडीएमए बरामद किया।

केरल के आबकारी विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से केरल में एमडीएमए की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। विभाग ने दो अलग-अलग अभियानों के तहत एक 18 वर्षीय युवती सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के कब्जे से कुल 279.3 ग्राम एमडीएमए, तीन ग्राम हशीश तेल, छह मोबाइल फोन और 69,500 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
संयुक्त आबकारी आयुक्त एस. विनोद कुमार ने बताया कि पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर एर्नाकुलम रेंज की टीम ने कुछ दिन पहले कोच्चि के कालूर स्थित एक लक्जरी होटल में छापेमारी की थी। वहां से टीम ने एक युवती और उसके साथी को 49.3 ग्राम एमडीएमए के साथ पकड़ा। पकड़ी गई युवती आगामी नवंबर महीने में 19 वर्ष की होने वाली है।
होटल से पकड़े गए दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर वरुण देव नामक मुख्य सप्लायर का नाम सामने आया, जो दिल्ली से केरल में मादक पदार्थों की खेप लाता था। इसके बाद विभाग को जानकारी मिली कि शनिवार को एर्नाकुलम जिले में ड्रग्स की एक बड़ी डील होने वाली है, जिसके मद्देनजर निगरानी बढ़ा दी गई।
शनिवार को वैटिला में ट्रैफिक जाम के दौरान आबकारी अधिकारियों ने संदिग्ध महिंद्रा थार एसयूवी को घेर लिया। वाहन की गहन तलाशी के दौरान स्टीयरिंग व्हील के नीचे बनाए गए एक गुप्त केबिन से 230 ग्राम एमडीएमए और तीन ग्राम हशीश तेल बरामद हुआ। गाड़ी में सवार वरुण देव और विपिन एस. कुमार को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया। दोनों आरोपी पथानमथिट्टा जिले के निवासी हैं और इनमें से एक पहले भी पुलिस द्वारा ड्रग्स मामले में पकड़ा जा चुका है।
अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह एसयूवी से दिल्ली जाता था और पुलिस की नजरों से बचने के लिए युवतियों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर मादक पदार्थ केरल लाता था। इसके बाद वे इसे राज्य के विभिन्न हिस्सों में खुदरा विक्रेताओं और ग्राहकों तक पहुंचाते थे।
संयुक्त आबकारी आयुक्त ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तस्कर गिरोह युवतियों और युवाओं को फंसाकर अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पकड़े जाने वाले अधिकांश युवा एनडीपीएस अधिनियम के गंभीर परिणामों से अनजान रहते हैं। वाणिज्यिक मात्रा के मामलों में कानूनन कम से कम 10 साल और अधिकतम 20 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
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