मेरठ के चंद्रलोक में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का हुआ भावपूर्ण मंचन
कथा व्यास आचार्य जनार्दन तिवारी ने भक्त और भगवान के अटूट प्रेम तथा समर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला।

मेरठ के चंद्रलोक इलाके में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का सजीव और भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर उपस्थित रहे।
कथा व्यास आचार्य जनार्दन तिवारी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि माता रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व मानकर उनकी शरण ली थी। जब भक्त सच्चे भाव से भगवान को याद करता है, तो ईश्वर उसकी प्रार्थना को कभी अनसुना नहीं करते। इसी क्रम में भक्त की पुकार स्वीकार करते हुए श्रीकृष्ण विवाह से पूर्व उन्हें मंदिर से अपने साथ ले गए थे।
आचार्य जनार्दन तिवारी ने बताया कि इसके पश्चात दोनों का विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का यह प्रसंग केवल एक कथा नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
कथा वाचक के अनुसार, माता रुक्मिणी का प्रेम किसी सांसारिक आकर्षण से परे था। यह ईश्वर के प्रति अनन्य श्रद्धा और सच्ची भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। जो भी भक्त सच्चे और निर्मल मन से प्रभु की शरण में जाता है, उसकी हर पुकार भगवान अवश्य सुनते हैं।
विवाह प्रसंग के इस पावन वर्णन के दौरान पूरे कथा पंडाल का वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा भाव के साथ 'राधे-राधे' और 'जय श्रीकृष्ण' के जयकारे लगाए, जिससे समूचा परिसर गुंजायमान रहा।
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