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दीपचंद बंधु अस्पताल एक्सपोज़्ड : डॉक्टर एसी रूम में मस्त, अप्रशिक्षित NO के भरोसे चल रहा अस्पताल, टाइट प्लास्टर ने सड़ाया ड्राइवर का पैर!Nw Distric : भारत नगर थाने की पुलिस ने अंतर्राज्यीय कार्रवाई कर पंजाब से 14 वर्षीय अपहृत बालिका को किया सकुशल बरामददिल्ली: स्पेशल स्टाफ ने जहांगीर पुरी में आरिफ हत्याकांड के तीन शातिर बदमाशों को दबोचा, हथियार बरामददिल्ली: भारत नगर थाने की गश्ती टीम ने शातिर ऑटो-लिफ्टर को किया गिरफ्तार, तीन चोरी के वाहन और चाकू बरामदमेरठ: भाजपा, संघ और बजरंग दल पर टिप्पणी मामले में आसपा नेता बदर अली पर मुकदमा दर्जगुरुग्राम के चिंतल्स पैराडिसो के असुरक्षित फ्लैट 1 जनवरी 2027 तक खाली करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश
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दीपचंद बंधु अस्पताल एक्सपोज़्ड : डॉक्टर एसी रूम में मस्त, अप्रशिक्षित NO के भरोसे चल रहा अस्पताल, टाइट प्लास्टर ने सड़ाया ड्राइवर का पैर!

-'पैर काटना पड़ेगा...' सरकारी अस्पताल की लापरवाही से तबाही की कगार पर गरीब ड्राइवर फरहान की जिंदगी -LG से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायत, पर नहीं जागी दिल्ली की व्यवस्था! दीपचंद बंधु अस्पताल की पोल खोल रिपोर्ट

Rajender Swami
Rajender SwamiDelhi Darpan
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12 सितंबर 2026 · 10:05 am1.1 हज़ार व्यूज़अपडेटेड 10:07 amwazirpur,Delhi
दीपचंद बंधु अस्पताल एक्सपोज़्ड: डॉक्टर एसी रूम में मस्त, अप्रशिक्षित NO के भरोसे चल रहा अस्पताल; टाइट प्लास्टर ने सड़ाया ड्राइवर का पैर!
दीपचंद बंधु अस्पताल एक्सपोज़्ड: डॉक्टर एसी रूम में मस्त, अप्रशिक्षित NO के भरोसे चल रहा अस्पताल; टाइट प्लास्टर ने सड़ाया ड्राइवर का पैर!Delhi darpan

-राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का स्वास्थ्य ढांचा किस तरह अपनी जवाबदेही खो चुका है, इसका एक खौफनाक और शर्मनाक उदाहरण अशोक विहार स्थित दीपचंद बंधु अस्पताल में देखने को मिला है। नरेला में एक सड़क हादसे का शिकार हुए 52 वर्षीय गरीब ड्राइवर फरहान चौधरी जब इलाज की उम्मीद लेकर इस सरकारी अस्पताल पहुँचे, तो उन्हें क्या पता था कि यहाँ का स्टाफ और डॉक्टर मिलकर उन्हें हमेशा के लिए अपाहिज बनाने की कगार पर धकेल देंगे। दिल्ली दर्पण टीवी की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट में अस्पताल के भीतर चल रहे जिस 'अवैध खेल' और घोर लापरवाही का खुलासा हुआ है, उसने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

  1. डॉक्टर एसी में मस्त, अप्रशिक्षित NO के हवाले मरीज दीपचंद बंधु अस्पताल का कड़वा सच यह है कि जिनके पास मेडिकल की डिग्री है, वे डॉक्टर आराम फरमा रहे हैं और इलाज का पूरा जिम्मा उन Nursing Orderly (NO) पर छोड़ दिया गया है जिनका काम केवल मरीजों की मदद करना होता है। अस्पताल में बिना किसी तकनीकी योग्यता और लाइसेंस के ये NO बेधड़क प्लास्टर चढ़ा रहे हैं, टांके लगा रहे हैं, ECG कर रहे हैं और ड्रिप-इंजेक्शन लगा रहे हैं। इसी फर्जीवाड़े और संवेदनहीनता का शिकार गरीब ड्राइवर फरहान हुए।
नर्सिंग अर्दली ( NO ) प्लास्टर करते हुए। और NO द्वारा मरीज को लगाए गए टांके
नर्सिंग अर्दली ( NO ) प्लास्टर करते हुए। और NO द्वारा मरीज को लगाए गए टांकेDelhi darpan tv
  1. X-Ray तक नहीं देखा, कसकर बांध दिया जांघ तक प्लास्टर एक्सीडेंट के बाद जब फरहान अस्पताल पहुँचे, तो X-Ray में टखने के फ्रैक्चर की पुष्टि होने के बावजूद डॉक्टरों ने X-Ray रिपोर्ट देखने तक की जहमत नहीं उठाई। अप्रशिक्षित NO ने घुटने की मुख्य चोट की अनदेखी करते हुए मरीज के पूरे पैर पर जांघ से लेकर उंगलियों तक इतना अत्यधिक टाइट प्लास्टर (Above-Knee Cast) बांध दिया कि नीचे पैर तक खून का दौरा (Blood Circulation) पूरी तरह ठप हो गया।
  1. 15 दिन तड़पता रहा मरीज, डॉक्टरों ने हाथ तक नहीं लगाया : प्लास्टर बंधने के 15-20 दिनों के भीतर मरीज के पंजे में असहनीय दर्द होने लगा। जब फरहान का बेटा उन्हें लेकर दोबारा ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों के पास पहुँचा और दर्द से तड़पते हुए गुहार लगाई, तो डॉक्टरों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। डॉक्टरों ने न तो पैर को छूकर देखा, न प्लास्टर खोला और न कोई जांच कराई। डॉक्टरों ने सीधे कह दिया कि "जाकर पट्टी करवा लो" और मरीज को वापस उसी अप्रशिक्षित NO के पास धकेल दिया।
  1. रोगी कल्याण समिति के सदस्य ने खोली पोल, पैर में फैला गैंग्रीन : मामला तब उजागर हुआ जब रोगी कल्याण समिति (RKS) के सदस्य प्रदीप कोहली ने अस्पताल के निरीक्षण के दौरान मरीज को तड़पते देखा। जब प्लास्टर हटवाया गया, तो नीचे का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। टाइट प्लास्टर के कारण नसों में खून न पहुँचने से पैर का निचला हिस्सा पूरी तरह काला पड़ चुका था और उसमें गैंग्रीन (Tissue Necrosis) फैल चुका था।
सभी हॉस्पिटल ने दिया जबाब। अब टांग काटना ही इलाज है।
सभी हॉस्पिटल ने दिया जबाब। अब टांग काटना ही इलाज है।Delhi Darpan

प्रदीप कोहली ने तुरंत इसकी तस्वीरें RKS के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में MS (डॉ. नीलम भारती), चेयरमैन और विधायक पूनम भारद्वाज को भेजीं। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने अपनी गलती सुधारने की जगह ढिठाई दिखाते हुए यह मनगढ़ंत बहाना बना दिया कि "मरीज स्मोक करता है, इसलिए ऐसा हुआ।"

  1. AIIMS और RML ने मोड़ा मुंह, अब पैर काटने की नौबत : प्रदीप कोहली की मदद से जब मरीज की एंजियोग्राफी कराई गई, तो नसों के पूरी तरह ब्लॉक होने की पुष्टि हुई। इसके बाद मरीज को RML और AIIMS ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि नसें सड़ने की वजह से अब पैर बचाना नामुमकिन है और इसे काटना ही पड़ेगा। विडंबना यह है कि इतना सब होने के बाद भी कोई अस्पताल गरीब मरीज को भर्ती करने तक को तैयार नहीं है। स पूरे मामले पर दिल्ली दर्पण टीवी की टीम ने ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हुए जब अस्पताल प्रशासन और MS (डॉ. नीलम भारती) से उनका पक्ष जानना चाहा, तो अस्पताल के अधिकारी कैमरे से भागते नजर आए और इस गंभीर लापरवाही पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। प्रशासन केवल "मामले की जांच कराने" की रटी-रटाई बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।

दीपचंद बंधु हॉस्पिटल की इस लापरवाही ने यह साबित कर दिया है की दिल्ली में बेशक सरकार बदली है , लेकिन हालत और भी बदतर है। उस पर दबंगई यह की शकायत के बावजूद भी इसकी जांच तक नहीं हो रही है। देश की राजधानी दिल्ली में गरीब की जान इतनी सस्ती समझ ली गयी है।

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