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स्कूल के वार्षिक उत्सव में दिखी विवादों की झलक

किसी भी स्कूल का वार्षिक उत्सव स्कूल का आईना होता है। जिसमे पता चलता है कि उस स्कूल या संस्था का माहौल क्या है। अशोक विहार के महाराज अग्रसेन स्कूल के वार्षिक उत्सव को भी देखकर लगा कि यहां सब कुछ सही नहीं चल रहा है। इस समारोह में बच्चों ने अपना गजब टैलेंट दिखाया तो स्कूुल मैनजेमेंट कमेटी ने अपना टकराव। हर वर्ष यहां मैनेमेंट कमेटी और कार्यकारणी की भारी मौजूदगी रहती थी लेकिन इस वर्ष यहां प्रधन सहित आध्ी से कहीं ज्यादा कार्यकारणी गायब थी। वजह प्रधन और महामंत्राी के बीच चल रहे विवाद ने स्कूल को भी अपनी चपेट में ले लिया। स्कूल से ईस्तीपफा देकर करीब तीन महिनें गायब रही प्रीसिपल पूनम गुप्ता इस समारोह में प्रसन्न मुद्रा में थी।

ये बैंड और स्कूली बच्चों के ये करतब…अशोक विहार के महाराजा अग्रसेने स्कूल में यह सब हर साल देखने को मिलता है। छोटे छोटे बच्चों की प्रस्तुति और छात्रों की काबिलियत देखकर यहां मौजूद लोग बच्चों की प्रतिभा के कायल होगें लेकिन मैनजेमेंट के प्रमुख लोगों की गैरमौजूदगी देखकर स्कूल से जुड़े लोगों को जरूरत बहुत कष्ट हो रहा है। हर साल स्कूल के वार्षिक स्कूल में अग्रवाल वैलपफेयर सोसायटी के ज्यादातर चुने हुये पदाध्किारी ही नहीं गायब नहीं दिखे बल्कि लगभग पूरी कार्यकारणी नदारद थी। वजह प्रधन पवन गुप्ता और महामंत्राी अनिल गुप्ता के बीच चल रहे विवाद का असर स्कूल पर भी इतना पड़ा कि स्कूल की प्रीसिंपल पूनम गुप्ता ईस्तीपफा देकर तीन महिनें घर बैठी रही। इस बीच महामंत्राी अनिल गुप्ता गुट का समर्थन मिला और कुछ कोर्ट का सहारा कि पूनम गुप्ता आज इस स्कूल में मौजूद ही नहीं है बल्कि इस समारोह में बच्चों कर प्रतिभा का गुणगान कर रही है। जबकि चंद दिनों पहले स्कूल में इनके घुसने पर तक पर रोक लगा दी गयी थी। इसे लेकर स्कूल में हंगामा भी हुआ था। स्कूल में प्रीसिंपल और प्रधन के बीच चल रहे विवाद में महामंत्राी की मौज हो गयी और उन्होनें प्रीसिंपल का पक्ष लिया जिसका नतीजा आज यह हुआ कि अनिल गुप्ता गुट के चार पदाध्किारी इस समारोह में है जबकि प्रधन सहित आध्े से ज्यादा पदाध्किारी और अध्कितर कार्यकारणी नदारद है। कंन्ट्रोल बोर्ड के कन्ट्रोल से भी बात बाहर हो गयी है। हालांकि यहां मौजूद ट्रस्टीगण मानते हैं कि प्रधन सहित बाकि लोगों को भी इस समारोह में होना चाहिए था। समाज के सम्मानित लोग इस विवाद से बहुत आहत हैं और इसे सोसायटी मे अब तक का सबसे शर्मनाक समय करार दे रहे है। सबको समाज के सम्मान का ख्याल रखने की सलाह दे रहे है।

यह समारोह जितना सम्मान जनक लग रहा है कुछ दिन पहले की ये तस्वीरें उतनी ही शर्मनाक है। स्कूल में हंगामा हुआ, कई बार पुलिस आयी। अभिभावकों ने रोड़ जाम तक किया। स्कूल का आलम यह रहा कि यहां मात्रा दो साल में 35 से ज्यादा टीचर नौकरी छोड़कर भाग गये। हालांकि प्रीसिंपल का कहना है कि जिन्हें सख्ती और अनुशासन में रहने की आदम नहीं थी वे चले गये। लेकिन साथ ही तीन महिनें तक स्कूल में न आने के इनके अपने तर्क है। प्रधन और महामंत्राी के बीच के विवाद का पूर लाभ पूनम गुप्ता को मिला और आज वे स्कूल में पिफर से काम तो कर रहे है लेकिन इस साो विवाद में समाज और स्कूल के सम्मान के साथ साथ प्रतिष्ठा प्रीसिंपल की भी कम हुयी है। समाज के सम्मानित लोग खुद को सेंडविच की तरह समझ रहे है। उन्हें समझ नहीं आता कि वे किसका पक्ष लें। उन्हें सोसायटी के सम्माना से ज्यादा अपना व्यक्तिगत सम्मान प्यारा है कि कहीं उनका कोई अपमान न कर जाये। बहार अग्रवाल वैलपफेयर सोसायटी अब तक अपने सबसे शर्मनाम दौर से गुजर रही है। ऐसे में यदि सम्माज के सर्वमान्य नेता सामने नहीं आये तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जायेगी।

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