सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेघर हुए लोग ,रोहिणी सैक्टर-15 के मॉर्डन अपॉर्टमेंट की घटना

दिल्ली के रोहिणी इलाके की मॉर्डन अपार्टमेंट में 15 -16 सालों से रहे रहें 14 परिवार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद घेघर हो रहे है इनमें ज्यादातर बुजुर्ग है इन का दर्द है की भ्र्ष्ट अधिकारीयों और माफिया ने मिलाकर एक फ़र्ज़ी आरटीआई का हवाला देकर कोर्ट को गुमराह किया गया है लेकिन चूँकि  आदेश सुप्रीम कोर्ट का है लिहाज़ा इन्हे समझ नहीं आ रहा है की ये फ़रियाद लगाएं भी तो किसे और कैसे? लिहाज़ा रोते बिलखते ये लोग मामले की सीबीआई जांच की मांग के साथ अब मीडिया से भी गुहार लगा रहे है की उनकी बात उस मुकाम तक पहुचाये जाए जहाँ न्याह हो सके यदि न्याय नहीं मिला तो वे आत्महत्या पर मजबूर हो जायेंगे  दिल्ली  के रोहिणी के मॉर्डन अपार्टमेंट में पिछले 15  सालों से रह रहे इन लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा था की एक झटके में इनके आशियाने पर आफत आ जाएगी एक फ़र्ज़ी आरटीआई को आधार बनाकर और भ्र्ष्ठ अफसर से सांठगांध कर कोइ इन्हे इनके उस घर से बेदखल कर देगा जिसे इन्होने अपने खून पसीने क कमाए से खरीदा था इस अपार्टमेंट के 14 परिवारों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश है की उन्हें 25 जनवरी  तक घर खाली करना है ऐसे में इन्हे समझ नहीं आ रहा ही की वे क्या करें और कहाँ जाएं कोर्ट के एक आदेश के बाद ये लोग गहरे सदमें में है आदेश चूँकि सुप्रीम कोर्ट का है , ऐसे में अपना दर्द सुनाएं भी तो किसे और कैसे ? लिहाज़ा ये लोग दिल्ली आज तक से गुहार लगा रहे है की वे उनका दर्ज़ उस मुकाम तक पहुचाएं जहाँ उनकी बात सुनी जा सके मॉर्डन अपार्टमेंट के ये सभी लोग 1993  से लेकर 1996  सोसायटी के सदस्य है और अपने हिस्से की प्लॉट ,निर्माण और शेयर मनी देते रहे है इन्हे 2002 में कब्जा दिया गया इस बीच 2008 में एक आरटीआई का जबाब आया जिसमें कहा गया की इस सोसायटी में 1999 तक 14  फलेट खाली थे इसी आरटीआई को आधार बनाकर कोर्ट को गुमराह किया गया इस आरटीआई की भी आरटीआई लगयाए गयी की इस पर किसके हस्ताक्षर है और यह कब जारी की गयी लेकिन इसका जबाब भी इन लोगों को नहीं मिल रहा है पिछले 10 सालों सोसतायी डिजॉल्व है और रजिस्ट्रार ऑफ़ कोऑपरेटिव सोसायटी द्वारा नियुक्त प्रशासक काम देख रहा है इन लगों का आरोप है  की यह सब भ्र्ष्ट अधिकारी से मिलकर की गयी धोखाधड़ी है इसी सीबीआई जांच होनी चाहिए 10 सालों से सोसायटी ने कभी उनकी सदस्यता को लेकर आपत्ति दर्ज़ नहीं की फिर अचानक ये अवैध कैसे हो गए इन महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में भी रो-रोकर अपना दुखड़ा सुनाया लेकिन कहीं कोइ सुनवाई नहीं हुयी –ये सभी 14 लोग उन सदस्यों की जगह सदय बने थे जिन्होंने सोसायटी की सदस्ता से त्यागपत्र दिया था इसके पूरी दस्तावेज इनके पास है कई सदस्यों की बैंक लोन इन घरों पर चल रहे है अब यदि ये किराये के घर में आये तो इनका गुजरा मुश्किल हो जाएगा लिहाज़ा ये विरोध कर रहे है और ऐलान कर रहे है की यदि उन्हें बेघर होना पड़ा तो वे आत्महत्या तक करने को मजबूर जो जायेंगे

 

 

 

 

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