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जानिए Signature Bridge की पूरी कहानी …

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रविवार को बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन करेंगे। यमुना नदी पर बना यह ब्रिज 5 नवंबर से आम जनता के लिए खुल जाएगा।

इस ब्रिज पर 154 मीटर ऊंचा ग्लास बॉक्स भी होगा जो पर्यटक स्थल के रूप में लोगों को शहर का ‘बर्ड् -आई व्यू’ देगा।इसके लिए चार एलिवेटर लगाए गए हैं। सिग्नेचर ब्रिज के सहारे एक बार में कुल 50 लोग पुल के शीर्ष तक पहुंच सकेंगे।

सिग्नेचर ब्रिज करीब 1518.37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाने वाला करीब 251 मीटर ऊंचा ब्रिज होगा। इसके पायलोन की ऊंचाई 154 मीटर होगी। ब्रिज पर 19 स्टे केबल्स हैं। सिग्नेचर ब्रिज का मुख्य आकर्षण उसका मुख्य पायलोन है। पायलोन के चारों तरफ शीशे लगाए गए हैं।

प्रोजेक्ट की योजना करीब 13 साल पहले शुरू की गयी थी।  2004 में मंजूर इस प्रोजेक्ट को 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले तैयार होना था। लेकिन उस समय इसमें कीमत 1131 करोड़ रुपये थी जबकि 2015 में इसकी कीमत को 1594 करोड़ किया गया। जबकी 1997 में इसकी लागत 464 करोड़ रुपये आंकी गयी थी।

ये पुल वजीराबाद रोड को करनाल बाईपास से जोड़ेगा। इससे न सिर्फ उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार, गोकुलपुरी, भजनपुरा और खजूरी की तरफ से मुखर्जी नगर, तिमारपुर, बुराड़ी और आजादपुर जाने वाले लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि कश्मीरी गेट से लोनी, सोनीपत, सहारनपुर, बागपत जैसे यूपी के शहरों में जाने वाले ट्रैफिक को जाम में नहीं फंसना पड़ेगा। वो आसानी से मंजिल की तरफ जा सकेंगे। जबकि अभी व्यस्त समय में वजीराबाद पुल पार करने में ही करीब एक घंटे का समय जाया होता है।

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