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पेस्टीसाइड की उचित मात्रा नुकसानदायक नहीं

ब्यूरो रिपोर्ट

पिछले कुछ समय से ऑर्गेनिक खेती के नाम पर देश भर में भ्रम फैलाया जा रहा है। पेस्टीसाइड को तरह-तरह से कोसा जाता है। अनेक तरह की बीमारियों का कारण पेस्टीसाइट को बताया जा रहा है लेकिन यह सच नहीं है।
हम आपको पेस्टीसाइड और ऑर्गेनिक खेती का सच बताना चाहते हैं। जैसा कि कहा जा रहा है कि पेस्टीसाइड नुकसानदायक है लेकिन यह हानिकारक तब है जब इसका इस्तेमाल आवश्यकता से अधिक मात्रा में किया जाता है। शिक्षा और जानकारी के अभाव में अधिक उत्पाद के लालच में पेस्टीसाइट का जरूरत से ज्यादा उपयोग करने से यह नुकसानदेह साबित होता है लेकिन निर्धारित मात्रा में इसके उपयोग से यह कतई हानिकारक नहीं है। फसलों में कीड़े के खात्मे के लिए पेस्टीसाइड की एक निर्धारित मात्रा तय होती है, ठीक उसी तरह जैसे बीमार व्यक्ति को जितनी मात्रा में दवा देनी होती है। उतनी ही मात्रा में फसलों के लिए पेस्टीसाइड की आवश्यकता होती है लेकिन अति हर जगह हानिकारक है।


पेस्टीसाइड की वजह से नुकसान की वजह सिर्फ उसका अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करना है। अगर पेस्टीसाइड का निर्धारित मात्रा में ही प्रयोग किया जाए तो यह उसी तरह फायदेमंद है जिस तरह बीमार व्यक्ति की निर्धारित मात्रा में दवा देना।
अब आपको बताते हैं ऑर्गेनिक उत्पादों की हकीकत।ऑर्गेनिक उत्पाद का मतलब बताया जाता है कि फसलें, अनाज, सब्जी, फल-फ्रूटस, दूध आदि का उत्पादन बिना किसी केमिकल के उत्पादन किया जाना बिना पेस्टीसाइड का इस्तेमाल किए प्राकतिक व परंपरागत तरीके से कृषि करना लेकिन यह आज किसी भी तरीके से संभव नहीं है।
हम देखते हैं आज चारों ओर से प्रदूषित वातारण ने हर जगह घुसपैठ कर ली है।

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जल, वायु, मिट्टी में घुले विषैले पदार्थ घुलमिल गए हैं। जल, वायु, मिटटी में पोषक तत्व रहे ही नहीं।
देश की परिवेशीय हवा में पीएम10, पीएम 2.5, एसओटू, एनओटू के अलावा हानिकारक धातुओं की मात्रा एकदम से बढ़ जाती है। इनमें आर्सेनिक, लेड, निकेल आदि प्रमुख हैं। इनकी मात्रा हवा में इतनी अधिक हो जाती है कि हवा मानव के अलावा सभी प्राणियों के लिए घातक हो जाता है। इनकी यह मात्रा मानव स्वास्थ्य, पशु, पक्षियों तथा परिवेशीय वायु पर्यावरण के लिये तो काफी हानिकारक है ही, क्या इससे तथाकथित ऑर्गेनिक खेती अछूती रह पाती है?


जल, वायु, मिटटी में घुले जहरीले पदार्थ ऑर्गेनिक फसलों पर भी गहरा असर करते हैं। यह वैज्ञानिक तथ्य है कि बाहरी विषैले वातावरण ने किसी भी उत्पाद की विशुद्धता को गहरे तक प्रभावित किया है।
ऑर्गेनिक उत्पादों का दावा झूठ है। हम सतर्क करना चाहते हैं कि ऑर्गेनिक के नाम पर केवल झूठ, भ्रम फैलाया जा रहा है।
हमारा दावा है यहऔर विश्वास है कि ऑर्गेनिक उत्पादों की शुद्धता पर अगर कोई रिसर्च कराई जाए तो इससे दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा। ऑर्गेनिक उत्पाद की शुद्धता कसौटी पर खरी नहीं उतरेगी।
मनुष्य के वातावरण में फैले हानिकारक जीवन नाशक विषैले पदार्थ, जो जल, वायु, मृदा, ध्वनि, रेडियोधर्मी आदि से एकत्रित हो कर कषि फसल, पशु उत्पाद, जीव-जंतु तथा पर्यावरण को अपने चपेटे में ले रहा है। इसलिए विशुद्ध उत्पादऑर्गेनिक उत्पादऑर्गेनिक खेती का दावा झूठा साबित होता है।


पेस्टीसाइट को दोष देना गलत है पेस्टीसाइड के बारे में शिक्षा व जानकारी का नितांत अभाव है। इसी के चलते गलत प्रचार किया जा रहा है पेस्टीसाइड जहर नहीं है दवा है जिसका उपयोग निर्धारित मात्रा में ही किया जाना जरूरी है इसका लिमिट में ही उपयोग फायदेमंद रहता है। अति तो हर चीज की बुरी होती है। आप समुचित जानकारी के आधार पर पेस्टीसाइट का प्रयोग करेंगे तो यह हानिकारक नहीं है।
निर्धारित मात्रा में उपयोग से ही आप अच्छी, भरपूर, कीड़े,किटाणु रहित स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं।

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