धनतेरस पर सर्राफा बाजार में रौनक बढ़ी

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पूनम स्वामी , दिल्ली दर्पण टीवी

धनतेरस की प्रमुखता

यू तो देश के हर त्योहार का अपना खास महत्व होता है लेकिन धनतेरस की प्रमुखता कुछ अलग है  है। इस दिन देश भर में लोग सोने चांदी के बर्तन सिक्के या आभूषण खरीदते है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन धन ( वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है।कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया ने बताया कि कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र मंथन के समय भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस तिथि तो धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम के जाना जाता है।

सोना और चाँदी देश में निवेशकों की प्राचीन काल से ही पहली पसंद रहा है। भारतीय परिवार अपनी हैसियत के अनुसार सोने-चाँदी में  निवेश करते रहे हैं और सोने-चाँदी ने निवेशकों को कभी निराश भी नहीं किया है।

सोने-चाँदी के भाव में पिछले साल के मुकाबले परिवर्तन

कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की गोल्ड एंड ज्वेलरी कमेटी के चेयरमैन पंकज अरोरा ने बताया कि पिछले वर्ष धनतेरस 2019 में  सोनेे का भाव रुपए 38923 प्रति 10 ग्राम और चाँदी का भाव रूपये 46491 प्रति किलो था जबकि इस साल नवंबर महीने में को सोने का भाव बढ़ कर रुपये 50520 प्रति 10 ग्राम हो गया है और चांदी भाव बढ़ कर रुपये 63044 प्रति किलो पहुँच गया है।

इस प्रकार सोने में निवेशकों ने 30% और चाँदी में निवेशकों को 35% का लाभ मिला है ।श्री अरोरा जी ने आगे कहा कि भारत में विविध संस्कृतियों और त्योहारों का समावेश है जिसमे धनतेरस और दीपावली का विशेष महत्त्व है जिसमे प्रत्येक भारतीय परिवार अपनी हैसियत के अनुसार सोने-चाँदी में निवेश करता है यह निवेश बुलियन, सिक्के, गहने आदि के रूप में होता है

सोने-चाँदी की बिक्री में बढ़ौतरी

श्री भरतिया ने कहा कि कोरोना माहमारी की वजह से देश में लोगो की क्रय छमता में कमी आयी है किन्तु सोने-चाँदी के बढ़ते भाव को देखते हुए इस वर्ष भी बाजारों में भारी निवेश की उम्मीद की जा रही है हमेशा की तरह सोना-चाँदी ही निवेशकों की पहली पसंद ही रहेगा। जिसके लिए सर्राफा बाजारों ने भी पूरी तैयारी की है और हर रेंज में ग्राहकों के लिए वैरायटीज उपलब्ध हैं पिछले वर्ष धनतेरस पर हुयी सोने-चाँदी की बिक्री में इस बार 15%से 18% की बढ़ौतरी की उम्मीद है।

श्री अरोरा ने कहा कि  पिछले वर्ष की तुलना में सोने के गहनों की खपत घटी है।  कोरोना महामारी की वजह से जहाँ पिछले वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में सोने के  गहने की खपत देश मे 101.6 टन थी वही इस साल की दूसरी तिमाही में यह खपत 48% गिरकर 52.8 टन रह गयी है वहीँ गोल्ड बार और सिक्को में  सुरक्षित निवेश के लिहाज से वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में खपत 149.4 टन से  49% बढ़कर 221.1 टन हुई थी। इस साल भी ऐसी ही उम्मीद जताई जा रही है कि कोरोना काल के परिणाम स्वरूप  लोग ज्यादातर सोने और चांदी में ही निवेश करेंगे जो कि सुरक्षित माना जाता है।

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